जीआईएस के असिस्टेंट प्रो.रामजी द्विवेदी ने बताया कि प्रशिक्षण के दूसरे दिन इनसार तकनीक की सहायता से धरती की सतह और भीतरी हिस्से की छोटी से छोटी गतिविधि का पता लगाया जाता है। इसकी सहायता से प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप, भूस्खलन, धरती धंसना और क्रिस्टल मूवमेंट की जानकारी काफी पहले मिल जाती है।
कम तीव्रता के भूकंप की भी जानकारी समय से मिले, इसके लिए शोध किए जा रहे हैं। मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) में जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) की ओर से इसरो आपदा प्रबंधन सहायता (डीएमएस) क्षमता निर्माण कार्यक्रम के तहत इंटरफेरोमीटर सिंथेटिक अपर्चर रडार तकनीक (इनसार) का अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं को 15 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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जीआईएस के असिस्टेंट प्रो.रामजी द्विवेदी ने बताया कि प्रशिक्षण के दूसरे दिन इनसार तकनीक की सहायता से धरती की सतह और भीतरी हिस्से की छोटी से छोटी गतिविधि का पता लगाया जाता है। इसकी सहायता से प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप, भूस्खलन, धरती धंसना और क्रिस्टल मूवमेंट की जानकारी काफी पहले मिल जाती है। इससे आपदा में होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। इस तकनीक को लगातार उन्नत करने का प्रयास किया जा रहा है।
इसकी सहायता से गतिविधियों पर निरंतर नजर रखी जाती है। प्रत्येक 12 दिन में जुटाए गए आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है। किसी भी स्थान पर सामान्य से इतर रीडिंग्स आने पर तुरंत आगाह कर दिया जाता है। प्रशिक्षण में आईआईटी रुड़की, आईआईएसईआर मोहाली, आईआईटी बॉम्बे समेत कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्यार्थी शामिल हैं। इस दौरान देश के कई संस्थानों के विद्वान अपने विचार रखेंगे।