बुगाथा श्रीनू : अपने प्रदर्शन से खुश नहीं दिखे श्रीनू, जीता एक लाख का पुरस्कारआंध्र प्रदेश के विजयनगर में स्थित गजपतिनगरम में धान के खेतों से दौड़ना शुरू करने वाले धावक बुगाथा श्रीनू अपने प्रर्दशन से संतुष्ट नहीं रहे। ओलंपिक की तैयारियों को मजूबत करने के लिए इंदिरा मैराथन में पहली बार दौड़ लगाने वाले श्रीनू ने पिछले वर्ष दिल्ली मैराथन में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए दो घंटे 14 मिनट और 59 सेकंड में दौड़ को पूरा किया था। इस बार भी वह दिल्ली और मुंबई मैराथन के सहारे ओलंपिक में जगह बनाने के अपने सपने को साकार करने के लिए दौड़ेंगे।
इंदिरा मैराथन में वह अपनी तैयारियों को परखने के लिए आए थे, लेकिन उन्होंने यहां पर अपनी दौड़ पूरी करने में कुल दो घंटे 21 मिनट और 56 सेकेंड का समय लिया। श्रीनू का कहना है कि वह अपनी दौड़ को दो घंटे 15 मिनट में ही पूरा करना चाहते थे। किसान परिवार में जन्मे श्रीनू के पिता सत्यम ने उनका हौसला बढ़ाया है। श्रीनू फिलहाल आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (पुणे) में कोच रंजन से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। श्रीनू ने दूसरे स्थान पर रहकर एक लाख रुपये का पुरस्कार जीता है।
अनिल कुमार : स्टेडियम में दर्शक चलाए अनिल-अनिल, खुशी से झूमा सीना
सेना में हवलदार के पद पर नौकरी कर रहे प्रयागराज के गंगापार में स्थित सुंदनीपुर कला के रहने वाले अनिल कुमार ने चौथी बार टॉप-तीन में जगह बनाई है। वह इस बार विजेता बनने के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन फिनिशिंग लाइन से पहले जहां बढ़त बनाने के लिए जोर लगाना पड़ता है वहां पर उनके पैर में खिंचाव आ गया। इससे अनिल को एक बार फिर से तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा है।
उन्होंने पहली बार 2018 की मैराथन में 2:25:39 घंटे में दौड़ पूरी की और महज छह सकेंड के अंतर से चूककर दूसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद वर्ष 2021 की मैराथन में अनिल ने 2:22:53 घंटे में दौड़ पूरी करके फिर से दूसरा स्थान हासिल किया। पिछले वर्ष अनिल ने 2:23:28 घंटे में दौड़ पूरी की और तीसरा स्थान कब्जाया। इस बार उन्होंने अपने समय को और सुधारकर 2:22:21 घंटे में दौड़ पूरी की लेकिन उन्हें तीसरे स्थान पर ही रहना पड़ा।
हालांकि स्थानीय धावक होने के चलते अनिल को मैदान पर समर्थन भी खूब मिला। अनिल ने जैसे ही विजेता धावकों के साथ स्टेडियम में प्रवेश किया वैसे ही पूरा मैदान अनिल-अनिल की आवाज से गूंज उठा। अनिल कहते हैं कि इस आवाज ने उनका जोश बहुत बढ़ाया और वह बेहद खुश हुए। विजेता बनना चाहता था लेकिन समय सुधरा है ये ही मेरी उपलब्धि है। अगली मैराथन में जरूर विजेता बनकर लौटूंगा।