राष्ट्रपति की यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा का हवाला देकर पत्थर गिरजाघर समेत सार्वजनिक स्थानों पर तीन दिन के लिए धरना प्रदर्शन पर रोक लगाने पर युवा मंच के सदस्यों ने शुक्रवार को बैठक कर आक्रोश जताया है। डेलीगेसियों व कार्यालय में बैठक कर विभिन्न् मांगों को लेकर चल रहे आंदोलनों को दबाने का आरोप लगाया। कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में यह अलोकतांत्रिक कदम है।
युवा मंच केसदस्यों ने कहा कि 19 सितंबर की जीआईसी प्रवक्ता की परीक्षा के बाद रोजगार के लिए आंदोलन तेज किया जाना है। उसके पहले आंदोलन की रणनीति के लिए प्रदर्शन होना था लेकिन प्रशासन ने ऐसा कर युवाओं की आवाज को दबाया है। युवा मंच संयोजक राजेश सचान ने कहा कि आज आजीविका का देशव्यापी संकट गहराता जा रहा है। उत्तर प्रदेश की स्थिति इससे अलग नहीं है लेकिन योगी सरकार सरकारी संसाधनों का बेजा इस्तेमाल कर रोजगार सृजन की बेहतर तस्वीर पेश करने में लगी है। इसकी सच्चाई उजागर होने के भय से शांतिपूर्ण ढंग से जारी धरना प्रदर्शन को सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देकर बैन किया गया।
युवा मंच अध्यक्ष अनिल सिंह ने कहा कि प्रदेश में पांच लाख रिक्त पदों को भरने, हर युवा को गरिमापूर्ण रोजगार की गारंटी और रोजगार मिलने तक जीवन निर्वाह लायक बेकारी भत्ता के आंदोलन को अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। युवा मंच प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य राम बहादुर पटेल व सीएमपी डिग्री कालेज के पूर्व अध्यक्ष करन सिंह परिहार ने शांतिपूर्ण ढंग से रोजगार संकट व सरकार की नीतियों के विरोध में आवाज उठाना युवाओं का लोकतांत्रिक हक है, इसे कोई भी सरकार छीन नहीं सकती है। अनंत प्रकाश सिंह, संजय तिवारी, सुरेश कुमार यादव, देवव्रत दूबे, रोहित, ईशान, अर्चना, बीएल यादव, धर्म राज यादव, श्रीकांत मिश्रा आदि मोजूद रहे।