प्रयागराज। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) के प्रबंधन अध्ययन विभाग की ओर से व्यवहारिक वित्त विषय पर आयोजित पांच दिवसीय समर स्कूल के दौरान यह बात प्रमुखता से उठी कि विशेषज्ञों को नवोदित शोधकर्ताओं की जिज्ञासाओं का धैर्य पूर्वक जवाब देना चाहिए। समर स्कूल में देश के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रतिभागियों ने आनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम में भागीदारी की। इस वर्ष के समर स्कूल में पांच देशों के प्रतिभागी भी आनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़े।
समर स्कूल के अंतिम दिन मंगलवार को असम विवि के प्रो. दिव्य ज्योति भट्टाचार्य ने वित्त के व्यवहारिक पक्ष की बारीकियों के बारे में बताया। बंगलूरू से आईसीएफएआई के प्रो. केशव राव ने स्टॉक मार्केट पर बात रखी। व्यवहार वित्त के क्षेत्र के माने जाने विशेषज्ञ प्रो. अमलेश भोवाल ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं को शांत करने के साथ समर स्कूल का नेतृत्व भी किया। उन्होंने नए शोधकर्ताओं को बताया कि केवल भ्रमित दिमाग एक जिज्ञासु मस्तिष्क है। व्
यवहार वित्त के क्षेत्र की विशालता का एहसास करने के लिए व्यवहार वित्त के मूल सार को कुरुक्षेत्र के युद्ध क्षेत्र से जोड़कर उन्होंने समझाया। प्रबंधन अध्ययन विभाग की प्रमुख डॉ. विजयश्री तिवारी ने कहा कि संस्थान ने व्यवहार वित्त के क्षेत्र में काम करने हेतु एक अनुकरणीय कदम उठाया है, जो कि संस्थान के शैक्षणिक कैलेंडर की विशेषता बन गई है। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रंजीत सिंह सह-समन्वयक डॉ. शशिकांत राय ने कहा कि ऑनलाइन ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।