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Hilsa Fish : जलस्तर घटने के चलते गंगा-यमुना से हिल्सा मछली विलुप्त, नदियों में छोड़े गए बच्चे

Wed, 08 May 2024 11:38 AM IST
विनोद सिंह प्रमोद यादव, प्रयागराज

सार

हिल्सा मूलत: समुद्री मछली है। इसे बांग्लादेश की राष्ट्रीय मछली का दर्जा प्राप्त है। ये मछलियां बारिश के मौसम में प्रजनन करने के लिए समुद्र से गंगा और यमुना में आती थीं। गंगा व यमुना के मीठे पानी में अंडे देने के बाद फिर समुद्र में लौट जाती थीं। नदियों की सैर करते यह मछलियां प्रयागराज, कानपुर और आगरा तक पहुंच जाती थीं।
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हिल्सा मछली। - फोटो : freepik
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विस्तार
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माछेर राजा यानी मछलियों का राजा कही जाने वाली हिल्सा अब गंगा व यमुना से विलुप्त हो गई है। बीते डेढ़ दशक से दोनों नदियों में इनके नहीं दिखने पर केंद्रीय अंतर्स्थलीय मत्स्य अनुसंधान केंद्र (सिफरी) की टीम ने पश्चिम बंगाल के बैरकपुर स्थित अपने मुख्यालय के जरिए इनके बच्चे गंगा में छोड़े हैं। सिफरी की टीम ने कुछ हफ्ते पहले ही इसका सर्वे किया था।

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हिल्सा मूलत: समुद्री मछली है। इसे बांग्लादेश की राष्ट्रीय मछली का दर्जा प्राप्त है। ये मछलियां बारिश के मौसम में प्रजनन करने के लिए समुद्र से गंगा और यमुना में आती थीं। गंगा व यमुना के मीठे पानी में अंडे देने के बाद फिर समुद्र में लौट जाती थीं। नदियों की सैर करते यह मछलियां प्रयागराज, कानपुर और आगरा तक पहुंच जाती थीं।

फरक्का बैराज बना बाधा

सिफरी प्रयागराज के प्रभारी डीएन झा बताते हैं कि 1975 में गंगा नदी में फरक्का बैराज बनने के बाद समुद्र से नदियों की ओर आ पाना हिल्सा के लिए मुश्किल हो गया। फिर, धीरे-धीरे पहले से मौजूद मछलियां घटने लगीं। गंगा-यमुना की नियमित निगरानी और बाजार में आने वाली मछलियों की जांच से पुष्टि हुई कि वर्ष 2010 के बाद यह इधर नहीं दिखीं। हिल्सा के घटने की वजह गंगा-यमुना का पानी घटना और प्रदूषण का बढ़ना भी है।

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18 हजार से अधिक मछुआरों को किया जागरूक

अधिकारियों का कहना है कि हिल्सा को फिर गंगा-यमुना का हिस्सा बनाने के लिए वर्ष 2020-22 तक फरक्का से प्रयागराज के बीच 440 जागरूकता कार्यक्रम किए गए। इस दौरान 18,000 से अधिक मछुआरों को जागरूक किया गया।

1000 रुपये किलो का भाव

मांसाहार करने वालों के लिए यह मछलियां न सिर्फ स्वादिष्ट होती हैं, बल्कि इनमें आयोडीन, जिंक, पोटैशियम जैसे पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके एंटी ऑक्सीडेंट गुण कैंसर की कोशिकाओं को पनपने से भी रोकते हैं। इनमें मौजूद ओमेगा-3 त्वचा को बेहतर बनाने में मददगार है। इसी कारण यह 700 से 1000 रुपये प्रति किलो तक बिकती है।
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