आरोपी को अपने आचरण के लिए नहीं है पछतावा
कोर्ट ने कहा कि अवमाननाकर्ता ने अपने आचरण के लिए ईमानदारी से माफी मांगी होती तो कोर्ट नरम रुख अपनाती। लेकिन, अवमाननाकर्ता जानबूझकर कार्यवाही से बचता रहा और वारंट जारी होने के बाद दो मौकों पर हिरासत में लिया गया था। इससे यह सिद्ध होता है कि अवमाननाकर्ता को अपने आचरण के लिए कोई पछतावा नहीं है।
उसमें कानून के अधिकार और भारत के संविधान के लिए कोई सम्मान नहीं है। इसलिए मामले में नरम रुख अपनाना गलत होगा। लिपिक ने प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, प्रदेश के मुख्यमंत्री, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को 15 दिसंबर 16 को शो काज नोटिस बनाम अली जामिन के हवाले से पत्र लिखकर बुलंदशहर जिला कोर्ट के जजों व स्टाफ अमर्यादित टिप्पणी की थी।