इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाथरस में एक व्यक्ति से 29 किलोग्राम गांजा बरामदगी के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है और मामले में जांच का आदेश देते हुए दोषी पाए जाने वाले पुलिस अफसरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी की खंडपीठ कर रही है।
कोर्ट ने कहा कि एक व्यक्ति को आधीरात को उसके घर से उठाने और एनडीपीएस मामले में मुकदमा दर्ज करना दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई प्रतीत होती है। मामले में याची ललित गुप्ता ने हाईकोर्ट में अपनी जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। याची के खिलाफ यूपी पुलिस ने नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम अपराध के तहत मामला दर्ज किया है। आरोप है कि पुलिस ने 11 जून 2021 को उसके पास से लगभग 29 किलोग्राम गांजा बरामद किया था और इसकेबाद उसे गिरफ्तार किया था।
याची ने कोर्ट के समक्ष दावा किया कि पुलिस ने उसके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण तरीके से कार्रवाई की है। याची केअधिवक्ता ने तर्क दिया कि याची को उसके आवास से चार नकाबपोश व्यक्तियों ने सिविल ड्रेस में उठा लिया था। उसकी पत्नी ने हाथरस पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर अपने पति के अपहरण की पूरी कहानी बताई तो उन्होंने जांच के आदेश दे दिए। पूछताछ में यह बात सामने आई कि सिविल ड्रेस में याची केघर आए लोग वास्तव में वे नोएडा पुलिस के अधिकारी थे।