इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पांच हजार करोड़ के घोटाले के मामले में राज्य सरकार को निष्पक्ष जांच कराने का आदेश दिया है। इसके साथ ही याची पर स्थानीय पुलिस द्वारा समझौते के लिए दबाव बनाए जाने पर रोक लगा दी है और पुलिस महानिरीक्षक से कहा है कि याची का पक्ष सुनकर पूरी सुरक्षा मुहैया कराएं। हाईकोर्ट ने यह आदेश बाबा बेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिरला और न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की दो जजों की पीठ कर रही है।
हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव और उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक से कहा है कि याची को सुनवाई का मौका देते हुए उसे पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाए। कोर्ट ने याची को डीजीपी के समक्ष फिर से आवेदन करने का निर्देश दिया। साथ ही डीजीपी को भी आवेदन को स्वीकार कर सुनवाई का मौका देने का आदेश दिया है।
कहा है कि चार हफ्ते में डीजीपी मामले में तिथि, समय और स्थान तय कर याची को व्यक्तिगत तौर पर सुनवाई का मौका दें। राज्य सरकार के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि मामले में जांच चल रही है। याची जांच अधिकारी के सम्मुख अपना बयान देने के लिए प्रस्तुत नहीं हो रही है। इस पर याची के वकील ने तर्क दिया कि मामला मनी लांड्रिंग का है, याची की जान को खतरा है और पुलिस द्वारा उस पर मामले का समझौता कराने का दबाव बनाया जा रहा है।
कोर्ट ने मामले को गंभीर बताया। पूछा कि मामले को आर्थिक अपराध शाखा या फिर प्रवर्तन निदेशालय को जांच के लिए क्यों न सौंप दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि मामला पैसे के लेन-देन (ट्रांसजेक्शन) का है, इसलिए स्थानीय एजेंसी सही तरीके से जांच करने में सक्षम नहीं है। कोर्ट ने मामले को राष्ट्रीय हित से जुड़ा बताते हुए केंद्र सरकार को भी पार्टी बनाने का निर्देश दिया और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया से संबंधित विभाग के सचिव से जवाब दाखिल करने को कहा है।
मामला जौनपुर जिले के जाफराबाद पुलिस स्टेशन के अंतर्गत है। मामले में याची बाबा-बेटी ने पांच हजार करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप में कंपनी के प्रमोटर्स और अलग-अलग बैंक के अधिकारियों के साथ कुल 28 लोगों के खिलाफ जाफराबाद पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420, 467, 468, 471, 474, 476, 506, 507 और 511 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस मामले में विवेचना कर रही है।