बैंकिंग लोकपाल के निर्णय को याची ने दी चुनौती
याची के बैंकिंग लोकपाल के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि याची के खाते से निर्धारित ब्याज दर से ऊंचे दर पर ब्याज की वसूली उसकी सहमति लिए बगैर की गई है। ऐसा किया जाना आरबीआई के दिशानिर्देशों का खुला उल्लंघन है, फिर भी बैंकिग लोकपाल द्वारा मामले के निस्तारण के दौरान उसे अनदेखा किया जाना गंभीर विषय है।
कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए हैरानी जताई। कहा कि आरबीआई जैसी जिम्मेदार संस्था खुद के बनाए दिशानिर्देशों का पालन कराने में विफल है। बैंकों के खिलाफ शिकायतों के निस्तारण में मूक दर्शक की भूमिका अदा कर रही है। जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए कहा कि फ्लोटिंग ब्याज दरों की तकनीकियों से ग्राहक को बताएं और उसकी सहमति लिए बगैर बैंक बदली हुए ब्याज दर ग्राहक से मनमानी वसूली नहीं कर सकते। कोर्ट ने नए सिरे से विचार कर नया आदेश पारित करने के लिए मामले को बैंकिग लोकपाल की पीठ को पुनः प्रेषित कर दिया।