इसके बाद याची ने एकल पीठ के आदेश के खिलाफ विशेष अपील दाखिल की, जिसकी सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए कहा कि चिकित्सा मूल्यांकन केवल एक अनुमान था। अपीलार्थी की आयु का निर्णायक प्रमाण नहीं था। एकल पीठ ने याची की याचिका को उसके जन्म दस्तावेजों की वैधता पर विचार किए बिना खारिज कर दिया, जो विधिक भूल थी।
लिहाजा एकल पीठ का आदेश और विद्यालय का निर्णय दोनों रद्द किए जाने के योग्य हैं। कोर्ट ने प्रधानाचार्य को आदेश दिया कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत याची को दो हफ्ते में उसकी आयु के अनुरूप कक्षा आठ में प्रवेश दिया जाए। भले ही उसने दो वर्ष स्कूली शिक्षा न ली हो।