यह था मामला
गुरुदीन बनाम राजबहादुर के बीच तहसीलदार मछलीशहर की अदालत में 2018 से म्यूटेशन वाद चल रहा है। हाईकोर्ट ने 20 मई 2019 को तहसीलदार को वाद निर्णीत करने का निर्देश दिया। कई बार सुनवाई की तारीख लगी किंतु वाद तय नहीं हो सका। कोर्ट ने कहा था कि केस की सुनवाई बेवजह स्थगित किए बगैर की जाए। कई तारीखों पर पीठासीन अधिकारी प्रशासनिक कार्य में व्यस्त रहे तो कई तारीखों पर वकीलों की हड़ताल के कारण सुनवाई नहीं हो सकी।
कोर्ट ने जौनपुर, मछलीशहर की राजस्व अदालत के वकीलों के रवैए की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि हाईकोर्ट से तहसीलदार को म्यूटेशन वाद तय करने का निर्देश दिया। वकीलों की हड़ताल व पीठासीन अधिकारी के प्रशासनिक कार्य में व्यस्तता के कारण केस तय नहीं हो सका तो दोबारा वाद तय करने के निर्देश जारी करने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने वकीलों को नसीहत दी और कहा पहले ही वाद तय करने का निर्देश दिया जा चुका है। याचिका खारिज कर दी।
फीस ले रहे हैं तो काम भी करें वकील
याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिड़ला ने कहा कि वाद तय करने के लिए निश्चित कार्य दिवस महत्वपूर्ण होता है। वकीलों की हड़ताल से कार्य दिवस नहीं मिल पाता। इस कारण से न्याय हित प्रभावित होता है। वकील फीस ले रहे हैं तो उन्हें काम भी करना चाहिए। यदि वकील हड़ताल पर हैं और वादकारी मौजूद हों तो पीठासीन अधिकारी को सुनवाई करनी चाहिए।
कोर्ट ने कहा अब ऐसे सभी मामलों का संज्ञान लेने का समय आ गया है, जहां वकीलों के काम से दूर रहने के कारण अनावश्यक मुकदमेबाजी हो रही है। कोर्ट ने आदेश की प्रति सभी बार एसोसिएशनों, उप्र बार काउंसिल, भारतीय बार काउंसिल, जिला जजों, मंडलायुक्तों व राजस्व परिषद को भेजने का निर्देश दिया है और कहा कि बार काउंसिल प्रस्ताव पारित कर वकीलों के लिए गाइडलाइन जारी करे।