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हाईकोर्ट ने कहा : वकील हड़ताल पर हों तो वादकारी की मौजूदगी में केस तय करें अधिकारी

Mon, 04 Oct 2021 08:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

हाईकोर्ट ने कहा, समय आ गया है कि वकीलों की हड़ताल से अनावश्यक मुकदमों का संज्ञान लिया जाए, बार कौंसिल को गाइडलाइन तय करने का निर्देश
 
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि वकील हड़ताल पर हों और वादकारी मौजूद हों तो पीठासीन अधिकारी केस की सुनवाई कर उसे तय करने की कोशिश करें। कोर्ट ने कहा वकील काम नहीं करते किंतु फीस लेते हैं। ऐसा करके वे व्यर्थ के मुकदमों का बोझ बढ़ाते हैं। यह राज्य के लिए दुखद स्थिति है। वादकारी को न्याय नहीं मिल पा रहा है। कोर्ट का समय बर्बाद हो रहा है। जन-धन की हानि हो रही है। वादकारियों को नुकसान न हो, इसकी गाइडलाइंस बननी चाहिए. साथ ही पीठासीन अधिकारी वादकारी को सुनकर न्याय करें।

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यह था मामला
गुरुदीन बनाम राजबहादुर के बीच तहसीलदार मछलीशहर की अदालत में 2018 से म्यूटेशन वाद चल रहा है। हाईकोर्ट ने 20 मई 2019 को तहसीलदार को वाद निर्णीत करने का निर्देश दिया। कई बार सुनवाई की तारीख लगी किंतु वाद तय नहीं हो सका। कोर्ट ने कहा था कि केस की सुनवाई बेवजह स्थगित किए बगैर की जाए। कई तारीखों पर पीठासीन अधिकारी प्रशासनिक कार्य में व्यस्त रहे तो कई तारीखों पर वकीलों की हड़ताल के कारण सुनवाई नहीं हो सकी।

कोर्ट ने जौनपुर, मछलीशहर की राजस्व अदालत के वकीलों के रवैए की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि हाईकोर्ट से तहसीलदार को म्यूटेशन वाद तय करने का निर्देश दिया। वकीलों की हड़ताल व पीठासीन अधिकारी के प्रशासनिक कार्य में व्यस्तता के कारण केस तय नहीं हो सका तो दोबारा वाद तय करने के निर्देश जारी करने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने वकीलों को नसीहत दी और कहा पहले ही वाद तय करने का निर्देश दिया जा चुका है। याचिका खारिज कर दी।

फीस ले रहे हैं तो काम भी करें वकील
याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिड़ला ने कहा कि वाद तय करने के लिए निश्चित कार्य दिवस महत्वपूर्ण होता है। वकीलों की हड़ताल से कार्य दिवस नहीं मिल पाता। इस कारण से न्याय हित प्रभावित होता है। वकील फीस ले रहे हैं तो उन्हें काम भी करना चाहिए। यदि वकील हड़ताल पर हैं और वादकारी मौजूद हों तो पीठासीन अधिकारी को सुनवाई करनी चाहिए।

कोर्ट ने कहा अब ऐसे सभी मामलों का संज्ञान लेने का समय आ गया है, जहां वकीलों के काम से दूर रहने के कारण अनावश्यक मुकदमेबाजी हो रही है। कोर्ट ने आदेश की प्रति सभी बार एसोसिएशनों, उप्र बार काउंसिल, भारतीय बार काउंसिल, जिला जजों, मंडलायुक्तों व राजस्व परिषद को भेजने का निर्देश दिया है और कहा कि बार काउंसिल प्रस्ताव पारित कर वकीलों के लिए गाइडलाइन जारी करे।
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अधिकारियों की व्यस्तता से भी होती है देरी
कोर्ट ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि अधिकारी अपने से बड़े अधिकारी के पास होते हैं या प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त होते हैं, जिसकी वजह से भी मुकदमे टल जाते हैं। मगर अधिकारी की व्यस्तता सुनवाई टालने का आधार नहीं हो सकती। आर्डर शीट देखने से पता चला कि 20 मई 19 को वकील हड़ताल पर थे। कुछ समय तक कोविड 19 के कारण कोर्ट नहीं बैठी। कोर्ट ने कहा कि चंद्र बली केस में कोर्ट के निर्देश पर सरकार से शासनादेश व सर्कुलर जारी कर समयबद्ध  कार्य योजना तय की है। उप्र जनहित गारंटी एक्ट 2011 के तहत विवाद यथाशीघ्र तय होना चाहिए। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के प्रफुल्ल कुमार केस के हवाले से कहा कि निर्देश का पालन नहीं किया जा रहा है।

बार-बार याचिका दाखिल कर बनाया जाता है दबाव
कोर्ट ने कहा वकील फीस लेकर केस दायर करते हैं। फिर हड़ताल करके मुकदमे की सुनवाई में उपस्थित नहीं होते और समय बीतने के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर शीघ्र निस्तारण का आदेश लेते हैं। इसके बाद भी वकील बहस करने नहीं आते और हाईकोर्ट के आदेश का पालन न होने पर अवमानना याचिका दायर कर दबाव डालते हैं और दोबारा हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हैं, यह केस इसका उदाहरण है।
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