इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि रोजगार संवेदनशील मामला है, आंख मूंदकर चरित्र प्रमाण पत्र न जारी किया जाए। यह तल्ख टिप्पणी कोर्ट ने मिर्जापुर के सहायक बोरिंग तकनीशियन के पद पर चयनित याची के चयन रद्द किए जाने पर की। क्योंकि, डीएम ने याची को चरित्र प्रमाणपत्र देने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया था कि उसके खिलाफ वैवाहिक विवाद को लेकर मुकदमा दर्ज है। इस पर विभाग ने उसका चयन रद्द कर दिया था।
मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की अदालत ने कहा कि आवेदकों का चरित्र प्रमाणपत्र जारी करते वक्त डीएम को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आजकल दबाव बनाने के लिए भी दहेज उत्पीड़न में पूरे परिवार को फंसाया जाता है। सहायक बोरिंग तकनीशियन के पद पर चयनित मिर्जापुर निवासी बाबा सिंह का चयन 16 फरवरी, 2024 को रद्द कर दिया गया था।
लघु सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता की ओर से जारी निरस्तीकरण आदेश में कहा गया था कि बाबा सिंह के बड़े भाई और उनकी पत्नी के बीच वैवाहिक कलह थी। भाभी के पिता ने भाई समेत पूरे परिवार पर दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया गया है। मामला लंबित है। हलांकि, याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि दहेज उत्पीड़न के दर्ज मामले पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है, फिर भी डीएम की ओर से चरित्र पत्र देने से इन्कार कर दिया गया।
कोर्ट ने कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि वालों को सेवा से बाहर करने का नियम उम्मीदवारों को केवल इसलिए अयोग्य ठहराने की परिकल्पना नहीं करता है कि वह पारिवारिक विवादों में फंसे हुए हैं। कोर्ट ने कहा दहेज उत्पीड़न के तहत पूरे परिवार को जानबूझकर भी फंसाया जाता है, ताकि उन पर दबाव बनाया जा सके। अगर इस तरह के अपराधों के आधार पर चयनित उम्मीदवार के आपराधिक इतिहास का आकलन किया जाता रहा तो वो दिन दूर नहीं, जब सार्वजनिक रोजगार के योग्य उम्मीदवार मिलना मुश्किल होगा।
कोर्ट ने डीएम मिर्जापुर और लघु सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता को नोटिस जारी किया है। उनसे 22 अगस्त तक जवाबी हलफनामा दाखिल करते हुए बताने को कहा है कि क्यों न याची के चयन को रद्द करने वाले आदेश को निरस्त कर दिया जाए। साथ ही उसकी नियुक्ति का आदेश दे दिया जाए। कोट ने आदेश की प्रति रजिस्ट्रार (अनुपालन) के जरिये 24 घंटे में डीएम मिर्जापुर और लघु सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता को तामील कराने का निर्देश दिया है।