याची की दलील
याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची ने निलंबन आदेश को हाईकोर्ट ने चुनौती दी थी, जिसपर हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश पर रोक लगाते हुए डीआईओएस से जवाब तलब किया था। लेकिन डीआईओएस ने जवाब देने के बजाय याची के खिलाफ नए आरोप लागते हुए डीएम बलिया से शिकायत की और फिर गबन के आरोप में नई जांच शुरू हो गई। इस नई जांच का हवाला देते हुए निलंबन आदेश पर पारित स्थगन आदेश का पालन नहीं किया।
यही नहीं, उन्होंने याची को जीवन निर्वाह भत्ता के रूप में कार्यवाहक प्रधानाचार्य का भत्ता न देकर प्रवक्ता को मिलने वाला भत्ता प्रदान करने का आदेश पारित कर दिया। याची ने उसे भी चुनौती दी। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए, पूर्व में पारित आदेश के अनुपालन में याची को वेतन सहित बहाल करने का आदेश पारित किया, लेकिन डीआईओएस ने नही माना, जबकि याची ने अवमानना याचिका भी दाखिल की और उस पर उन्हें नोटिस जारी हुई है।
इसकी जानकारी पर याची के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई, उस पर भी हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। याची का आरोप है कि डीआईओएस दुर्भावनापूर्ण तरीके से याची को हटा कर सहायक अध्यापक आलोक कुमार सिंह की जबरन नियुक्ति करना चाहते है। जबकि वह इस पद के लिए योग्य नहीं है।