दोनों दोषियों ने पूरी कर ली है 13 साल की सजा
हाईकोर्ट के समक्ष दोनों याचियों ने कानपुर नगर के सत्र न्यायाधीश के फैसले को चुनौती दी थी। सत्र न्यायालय ने स्वापक औषधि और मन: प्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985 में दोष सिद्ध पाते हुए याची यशपाल को 15 वर्ष का सश्रम कारावास व तीन लाख रुपये जुर्माने और संजय कुमार विश्वकर्मा को 18 साल का सश्रम कारावास व चार लाख रुपये जुर्माने से दंडित किया था।
याचियों की ओर से सत्र न्यायालय द्वारा लगाए गए अर्थदंड को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने पाया कि दोनों ही दोषियों ने 13 साल की सश्रम सजा पूरी कर ली है। पूर्व में कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और कारावास के दौरान कोई प्रतिकूल टिप्पणी भी नहीं है, जो दंड के सुधारवादी सिद्धांतों को बल प्रदान करते हैं। कोर्ट ने इन आधारों पर याचियों की जुर्माने की सजा को घटाकर एक लाख कर दिया।