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High Court : श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में आए आदेश में संशोधन के लिए वादी अधिवक्ता ने दाखिल किया प्रार्थना पत्र

Mon, 05 Aug 2024 06:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि शाही मस्जिद ईदगाह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन एक संरक्षित स्मारक है, जिसका विवरण उन्होंने अपने केस संख्या 07/2023 के वादपत्र के अनेक कथनों में RTI नम्बर सहित किया है।
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि व शाही ईदगाह विवाद मामले में आए एक अगस्त को आए आदेश में संशोधन के लिए योगेश्वर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ट्रस्ट के अध्यक्ष व वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने संशोधन प्रार्थना पत्र उच्च न्यायालय में दाखिल किया। वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि उच्च न्यायालय ने जो पोषणीयता पर आदेश दिया है वह स्वागत योग्य है, लेकिन उसमें तकनीकी खामियां हैं जिनका फायदा विपक्षीगणों को मिल सकता है। अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि शाही मस्जिद ईदगाह पक्ष व सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड ने आदेश 7 नियम 11(डी) सिविल प्रक्रिया संहिता के अधीन वाद पत्र को खारिज प्रार्थना दिया था, जिसमें यह कानून है कि केवल वादपत्र में लिखे कथनों के आधार पर पोषणीयता तय हो सकती है, अतिरिक्त कोई अन्य तथ्य या प्रमाण पोषणीयता के स्तर पर नहीं लिया जाएगा।

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अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि शाही मस्जिद ईदगाह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन एक संरक्षित स्मारक है, जिसका विवरण उन्होंने अपने केस संख्या 07/2023 के वादपत्र के अनेक कथनों में RTI नम्बर सहित किया है। इन कथनों का उल्लेख पोषणीयता के आदेश में नहीं किया गया है। केवल केस संख्या 7 में ही इस बात का उल्लेख है कि शाही मस्जिद ईदगाह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन संरक्षण स्मारक है जिसके कारण पूजा स्थल अधिनियम 1991 उनके केस पर लागू नहीं होता, केस संख्या-7 के इस कथन का उल्लेख आदेश में न किया जाना केस संख्या 7 को प्रभावित करेगा जिसका लाभ मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट में पोषणीयता आदेश को चैलेंज करने पर मिलेगा।

अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि केस में वक़्फ़ से संबंधित पोषणीयता के आर्गुमेंट जिनका उल्लेख पोषणीयता आदेश में पैरा संख्या- 97,98,99,101,101,103 उनके द्वारा किए गए और  न्यायालय के समक्ष वक़्फ़ की स्थिति स्पष्ट की, लेकिन न्यायालय ने भूलवश इनमें उनका नाम नहीं लिखा, जबकि सभी वकीलों का नाम आदेश के अन्य आर्गुमेंट में लिखा है। अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने पोषणीयता पर बहस के दौरान न्यायालय को बताया था शाही ईदगाह पक्ष ने जो वर्ष 1936 के लिस्ट दाखिल की है, उसकी वर्तमान समय में कोई कानूनन वैल्यू नहीं है, क्योंकि वर्ष 1936 के यूपी वक़्फ़ एक्ट को वर्ष 1960 के यूपी वक़्फ़ एक्ट द्वारा समाप्त कर दिया गया और वर्ष 1960 के यूपी वक़्फ़ एक्ट को वर्ष 2021 के यूपी रिअपीलिंग एक्ट द्वारा खत्म कर दिया गया जिसकारण 1936 की वक़्फ़ लिस्ट कानूनन मान्य नहीं है।

अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी बहस में कहा था कि शाही मस्जिद ईदगाह का वक़्फ़ एक्ट 1995 के अधीन धारा 4 में वर्णित अभी तक सर्वे नहीं हुआ है, जिसके संबंध में उन्होंने सलेम मुस्लिम बरीअल ग्राउंड प्रोटेक्शन कमेटी बनाम तमिलनाडु राज्य की सुप्रीम केस आदेश नज़ीर दी जिसमें साफ साफ कहा गया है कि बिना धारा 4 की कार्यवाही पूरी किये बिना वक़्फ़ लिस्ट को वैध नहीं माना जा सकता, अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने न्यायालय को बताया कि शाही मस्जिद ईदगाह का अभी तक वक़्फ़ एक्ट की धारा 4 के अनुसार सर्वे नहीं हुआ है जिसकारण वक़्फ़ की संपत्ति नहीं है।
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अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि आदेश में उनके केस संख्या 7 के कथनों का उल्लेख न होना मुस्लिम पक्ष को फायदा देगा उन्ही के आधार पर वह सुप्रीम कोर्ट में आदेश को चैलेंज करेंगा। वर्ष 1920 से वर्तमान समय तक शाही मस्जिद ईदगाह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन एक संरक्षित स्मारक है जिसकी कानूनन मालिक केंद्र सरकार है।

अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने केस संख्या-7 के वाद पत्र के कथन में लिखा है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के प्रथम महानिदेशक अलेक्जेंडर कनिंघम ने अपनी रिपोर्ट आर्कियोलॉजिकल ऑफ इंडिया फोर रिपोर्ट्स मेड ड्यूरिंग द ईयर 1862-63-64-65 के प्रथम वॉल्यूम में कृष्ण जन्मभूमि का अष्टभुजीय नक्शा दिया है और उसका विवरण दिया जिसके उल्लेख पोषणीयता के आदेश में नहीं किया गया है। इन्हीं महत्वपूर्ण तथ्यों का समावेश पोषणीयता के आदेश में करवाने के लिए संशोधन प्रार्थना पत्र दिया है। यही तथ्य कृष्ण जन्मभूमि केस के निर्णय में महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे। संशोधन प्रार्थना पत्र केस संख्या 7 में एडवोकेट नमन किशोर शर्मा अधिवक्ता अमित शुक्ला व वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने किया।
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