खंडपीठ ने भी प्रवेश न दिए जाने के सवाल पर एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा। जबकि, छात्र को दी जाने वाली मुआवजा राशि तीस हजार से बढ़ाकर पांच लाख कर दी। कहा कि छात्र ने कोई धोखा नहीं किया, बल्कि महाविद्यालय ने लापरवाही संग काम किया। क्योंकि, छात्र को प्रवेश दिए जाने की संस्तुति महाविद्यालय ही देता है। यह आश्चर्यजनक है कि निर्धारित मापदंड के विपरीत महाविद्यालय ने न सिर्फ छात्र को प्रवेश दिया, बल्कि परीक्षा में भी शामिल करवाने की संस्तुति भी की।