आरोपियों ने सजा के आदेश को दी थी हाईकोर्ट में चुनौती
पीड़िता की मां ने तीन अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पीड़िता के नाबालिग होने के कारण मुकदमों में पॉक्सो एक्ट बढ़ाया गया। पॉक्सो एक्ट लागू होने के बाद यह आजमगढ़ का पहला मुकदमा था। विवेचना के दौरान आजमगढ़ के फरिहां थाना निजामाबाद निवासी शकील, सड्डू उर्फ शादाब, जिला जौनपुर के ग्राम मटियारा थाना सरपतहा निवासी सिराज अहमद व ग्राम छाऊ थाना गंभीरपुर निवासी कठऊ उर्फ शाह आलम का नाम प्रकाश में आया।
ट्रायल के दौरान पीड़िता समेत कुल आठ गवाहों के बयान, दोनों पक्षों की दलीलों पर सत्र अदालत ने वर्ष 2021 में शकील, सड्डू उर्फ शादाब, सिराज अहमद, शाह आलम को आजीवन कारावास और एक लाख पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। सत्र अदालत से मिली सजा को चारों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
हाईकोर्ट ने अपीलों को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए चारों का सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सड्डू उर्फ शादाब को मिले अर्थदंड को निलंबित कर दिया। जबकि, शेष तीन दोषियों के अर्थदंड की आधी रकम पर रोक लगाते हुए बाकी की रकम रिहाई के छह महीने के भीतर जमा करने का आदेश दिया है।