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High Court : हाईकोर्ट ने समझौते के आधार पर पॉक्सो मामले को रद्द करने से किया इन्कार, कोर्ट ने कहा जघन्य अपराध

Fri, 23 Aug 2024 07:31 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

जालौन के थाना कोतवाली में आरोपी पर 2021 में बच्चे के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म करने व पॉक्सो सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोपी ने समझौते के आधार पर हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर मुकदमे को रद्द करने की गुहार लगाई।
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अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समझौते के आधार पर पॉक्सो के मामले को रद्द करने से इन्कार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराध सबसे जघन्य अपराधों में से हैं। ऐसे अपराध पीड़ित बच्चे पर गहरे और स्थायी घाव छोड़ जाते हैं। जो बच्चो के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक स्थिरता और सामाजिक संबंधों को प्रभावित करते हैं। बचपन में मिला भावनात्मक आघात वयस्क होने तक बना रहता है। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने रामबिहारी की अर्जी खारिज कर दी।

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जालौन के थाना कोतवाली में आरोपी पर 2021 में बच्चे के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म करने व पॉक्सो सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोपी ने समझौते के आधार पर हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर मुकदमे को रद्द करने की गुहार लगाई।

आवेदक के वकील ने दलील दी कि पीड़ित के पिता ने जनवरी 2021 में भैंस खरीदने के लिए आरोपी से 40 हजार रुपये उधार लिए थे। पैसे वापस नहीं किए गए। जब रुपये वापस मांगे तो पीड़िता के पिता ने उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करा दिया। अब दोनों पक्षों में समझौता हो गया और आरोपी पक्ष ने मामले को रद्द करने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की है। वहीं, राज्य के वकील ने पॉक्सो अधिनियम के मामले को रद्द करने का विरोध किया। कहा कि ऐसा करने से समाज में गलत संकेत जाएगा। आरोपी को मासूम बच्चों का शोषण करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
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अदालत ने पीड़ित के बयान पर गौर किया और पाया कि जब वह 13 साल का था, तब उसके साथ अप्राकृतिक संबंध बनाया गया। बच्चा तीन वर्ष बाद शिकायत दर्ज कराने का साहस जुटा पाया। न्यायालय ने कहा कि अपराध गंभीर है। इसका बच्चे के मनोविज्ञान और व्यवहार पर व्यापक असर पड़ेगा। न्यायलय ने आवेदक की अर्जी खारिज कर दी।

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