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High court: 22 वर्षों से क्यों नहीं भरा गया प्रधानाचार्य का पद, डीआईओएस गोरखपुर के खिलाफ कार्रवाई करे सरकार

Fri, 28 Oct 2022 07:27 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कोर्ट ने मामले में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के सचिव से गोरखपुर मंडल में प्रधानाचार्य और शिक्षकों के खाली पदों का विवरण हलफनामे पर मांगते हुए गोरखपुर के वर्तमान डीआईओएस ज्ञानेंद्र कुमार सिंह धुरिया और इसके पहले डीआईओएस रहे प्रदीप कुमार मिश्रा और सतीश के खिलाफ की गई कार्रवाई की भी जानकारी देने को कहा है।
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Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर के एक स्कूल में 22 वर्षों से प्रधानाचार्य का पद खाली रहने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पूछा है कि आखिर 22 वर्षों से प्रधानाचार्य का पद क्यों खाली है। कोर्ट ने कहा, इस मामले में पूर्व में दाखिल याचिका में स्पष्ट आदेश दिया गया था। वहीं इस संबंध में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक ने हलफनामा दाखिल कर कार्रवाई करने के लिए कहा था। इसके बावजूद यह पद खाली है।

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कोर्ट ने मामले में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के सचिव से गोरखपुर मंडल में प्रधानाचार्य और शिक्षकों के खाली पदों का विवरण हलफनामे पर मांगते हुए गोरखपुर के वर्तमान डीआईओएस ज्ञानेंद्र कुमार सिंह धुरिया और इसके पहले डीआईओएस रहे प्रदीप कुमार मिश्रा और सतीश के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी देने को भी कहा है। 


यह जानकारी अपर मुख्य सचिव को 18 नवंबर को अगली सुनवाई पर हलफनामे के जरिए मुहैया करानी है। कोर्ट अगर इस हलफनामे पर संतुष्ट नहीं होती तो 19 नवंबर को अपर मुख्य सचिव को कोर्ट के समक्ष पेश होना होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह ने गोरखपुर स्थित श्री गांधी इंटर कॉलेज की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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मामले में याची की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अवनीश त्रिपाठी ने कहा, कॉलेज में 22 वर्षों से प्रधानाचार्य का पद रिक्त है। इस बारे में स्कूल प्रशासन की ओर से कई बार माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड और माध्यमिक शिक्षा सचिव उत्तर प्रदेश को सूचित किया गया लेकिन, कोई कार्यवाही नहीं की गई। याची ने पहले भी याचिका दाखिल की थी, जिस पर कोर्ट में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला की ओर से हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि याची के स्कूल में प्रधानाचार्य के पद को भरे जाने के लिए कार्यवाही की जा रही है।  इसके बावजूद पद अब तक खाली है।   


इससे स्कूल सही तरीके से अपना कार्य नहीं कर पा रहा है और याची को दोबारा याचिका दाखिल करनी पड़ी। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा की ओर से दिए गए हलफनामे को देखते हुए तीखी नाराजगी जताते कहा कि शिक्षा समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उसे ऐसे ही नहीं छोड़ा जा सकता है। इससे छात्र प्रभावित होगा और भारी क्षति होगी। 
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लिहाजा शिक्षा व्यवस्था को सुव्यवस्थित और विश्वसनीय बनाए जाने की जरूरत है, जिससे कि समाज लाभान्वित हो सके। कोर्ट ने मामले में अपर मुख्य सचिव और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगते हुए कुल चार मामलों में जानकारी देने को कहा है। कोर्ट ने पूछा है कि दोनों अधिकारी यह बताएं कि गोरखपुर डीआईओएस दो पूर्व और वर्तमान के खिलाफ  क्या कार्रवाई की गई है।


प्रधानाचार्य और शिक्षकों के पिछले 10 वर्षों में कितने पद खाली हैं, कितने की नियुक्ति हुई है। खाली पदों को भरे जाने के लिए क्या कार्यवाही की गई है। खाली पदों को समय सीमा के भीतर भरा जाए। कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से कहा है कि वह बताए कि गोरखपुर मंडल में 10 वर्षों में प्रधानाचार्य और शिक्षकों के खाली पदों पर भर्ती के लिए कितनी परीक्षाएं हुई हैं। 


परीक्षाओं के परिणाम घोषित किए गए हैं, तो कितने पदों पर भर्ती हो चुकी है और कितने पद खाली हैं। इसके साथ ही प्रतीक्षा सूची में कितने अभ्यर्थियों का नाम शामिल है। कोर्ट ने मामले में सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तिथि तय की है।
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