एक बहन और दो भाइयों के बीच सबसे बड़े श्याम शंकर संघर्षों के बीच रास्ता तलाशते हुए सफलता की मंजिल तक पहुंचे। उनका परिवार भी आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। पिता मुरलीधर किसान और मां गीता देवी गृहणी हैं। पैरों से 65 फीसदी दिव्यांग 29 वर्षीय श्याम बचपन में ही पोलियो के शिकार हो गए थे। जीवन की राह कांटों भरी थी, लेकिन कदम कभी डिगे नहीं। कभी उधार लेकर तो कभी परिवार वालों के सहयोग से कोचिंग के लिए पैसों का इंतजाम किया।
दोनों ने हिंदी माध्यम से दी परीक्षा
पीतम सिंह एवं श्याम शंकर दोनों ने ही पीसीएस-2021 की परीक्षा हिंदी माध्यम से दी और सफलता हासिल की। पीसीएस मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषय के तौर पर पीतम ने इतिहास जबकि श्याम शंकर ने राजनीति विज्ञान लिया। श्याम को तीसरे प्रयास में सफलता मिल गई। वहीं, पीतम इससे पहले 2018 में पीसीएस का इंटरव्यू दे चुके हैं। वह दूसरी बार इंटरव्यू तक पहुंचे और सफलता हासिल की।