कैदियों को मिलनी चाहिए उनके अधिकार की जानकारी
हाईकोर्ट ने जेल अधिकारियों से पूछा था कि इतने लंबे समय से जेल में बंद विचाराधीन कैदी को उसके विधिक अधिकार की जानकारी दी गई या नहीं। सिर्फ इतना बताया कि 11 साल से जेल में बंद है। जबकि, सुप्रीम कोर्ट ने सौदान सिंह केस में कहा है कि जेल प्राधिकारियों का दायित्व है कि वह कैदी को उसके अधिकारों की जानकारी दें। किसी कैदी को छुड़ाने वाला कोई न हो तो विधिक सेवा प्राधिकरण के जरिये कानूनी सहायता दी जाए।
याची पर एक केस उस समय दर्ज किया गया जब वह जेल में बंद था। एफआईआर में नामित नहीं था। बाद में विवेचना के दौरान नाम आया। इस मामले में जेल अधिकारी भी आरोपित हैं। दो आरोपियों की जेल में ही मौत हो चुकी है। सह अभियुक्तों को जमानत मिल चुकी है।