पति ने निचली अदालत के फैसले को दी थी चुनौती
मामले में अरविंद उपाध्याय ने निचली अदालत के चार नवंबर और आठ नवंबर 2016 को पारित आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उसके खिलाफ घरेलू हिंसा संरक्षण कानून अधिनियम-2005 के तहत केस था। कोर्ट ने याची की पत्नी और बच्चे को अलग से रहने की व्यवस्था करने और 1000 रुपए भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने याची के पक्ष में उक्त दोनों आदेशों के अमल पर रोक लगा दी थी।
इस बीच याची दो साल तक लापता रहा। बाद में कोर्ट के आदेश से वाराणसी प्रशासन ने उसे ढूंढ कर कोर्ट में हाजिर किया था। उसकी पत्नी भी कोर्ट में मौजूद थी। कोर्ट ने दोनों के बीच सुलह-समझौता कराने की भरपूर कोशिश की। मगर कोर्ट का यह प्रयास असफल रहा। हाईकोर्ट ने याची की अर्जी को खारिज कर दिया। साथ ही कोर्ट में उपस्थित पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया कि वे याची को न्यायिक अभिरक्षा में केंद्रीय कारागार वाराणसी भेजें।