कोर्ट ने तलब किए नोटिस, बनाई वकीलों की टीम
कोर्ट ने पीडीए के जोनल अधिकारी संजीव उपाध्याय से आर्थिक दोहन पर जवाब मांगा। वह मौन रहे तो कोर्ट ने नोटिस भेजने की प्रक्रिया पूछी। बताया गया कि विधि अधिकारी की राय पर नोटिस दिए जाते हैं। कोर्ट ने पीडीए के विधि अधिकारी से पूछा कि ध्वस्तीकरण का नोटिस स्वविवेक देते हैं कि ऊपर से आए फरमान के मुताबिक। उन्होंने बताया कि नियमानुसार जारी करते हैं।
बार के अध्यक्ष ने इसका प्रतिवाद किया। कहा, नोटिस के जरिए पीडीए में भ्रष्टाचार का खेल खेला जाता है। कोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए विधि अधिकारी से पीडीए में रखे नोटिस तत्काल पेश करने का आदेश दिया। हिदायत दी कि किसी प्रकार की हेराफेरी न हो। पीडीए से नोटिस लाने के लिए कोर्ट ने दोनों पक्षों की सहमति से वकीलों की टीम भी गठित की। इसे लेकर पीडीए तक खलबली मच गई।
पीडीए अधिकारी करीब ढाई बजे नोटिस की 300 प्रतियां लेकर कोर्ट पहुंचे। जोनल अधिकारी ने बताया कि शहर में 50 अवैध निर्माण तोड़े गए हैं। अकेले झूंसी जोन में 300 लोगों को नोटिस जारी किया गया है। अदालत ने 20 नवंबर की तिथि नियत करते हुए पीडीए के उपाध्यक्ष, जोनल अधिकारी और मुख्य अभियंता से हलफनामे पर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने कहा...सीडी यहीं चलवा दें
पीडीए के अधिकारी उस वक्त बगलें झांकने लगे, जब अदालत में बार अध्यक्ष ने सुबूत के बतौर एक ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की सीडी पेश कर दी। इसमें दावा किया गया था कि भवन के निर्माण के दौरान प्राधिकरण के लोग पहुंचकर आम लोगों का उत्पीड़न करते हैं। इस सीडी में इसका सुबूत है। कोर्ट ने पीडीए के अधिकारियों से जवाब मांगा तो वह चुप रहे। कोर्ट ने टिप्पणी कि... इसे यहीं चलवा दें, देख लीजिए।