लोक सेवा आयोग का कहना था कि सेवा नियमावली में टाइप टेस्ट में किसी भी प्रकार की गलती से छूट देने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए चयन को रद्द किया गया। जबकि, याचियों के अधिवक्ता का कहना था कि ऐसा कोई टाइप टेस्ट नहीं हो सकता है। जिसमें, अभ्यर्थी कोई गलती न करें। सभी प्रकार के टाइप टेस्ट में कुछ हद तक गलतियों से छूट रहती है। लोक सेवा आयोग केपास इसकी गणना करने का अपना फार्मूला है।
टाइप टेस्ट की परीक्षा आयोग अपने तयशुदा सुधार फार्मूले के तहत करवाता है। कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर चयन प्रक्रिया रद्द कर देने से चयनित अभ्यर्थियों को नुकसान होगा तथा उन्हें नए सिरे से नए अभ्यर्थियों के साथ प्रतियोगिता में शामिल होना पड़ेगा। कोर्ट ने आयोग के 24 अगस्त 2021 के आदेश को रद्द करते हुए 1047 अभ्यर्थियों को नियुक्त के लिए संस्तुतियां जारी करने केलिए कदम उठाने का निर्देश दिया है।