इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चक आवंटन के मामले में सहायक चकबंदी अधिकारी के पुनरीक्षण आदेश को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही पुराने आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि चकबंदी आयुक्त उत्तर प्रदेश की ओर से 26 मई 1981 को जारी अधिसूचना और जोत चकबंदी अधिनियम 1953 में सभी गांवों में मुख्य सड़कों, राष्ट्रीय एवं प्रांतीय मार्गों या किसी अन्य सड़क पर स्थित भूमि को चक आवंटन कार्यवाही से बाहर रखने का उल्लेख है, लेकिन सहायक चकबंदी अधिकारी ने इस बात का ध्यान नहीं रखा और फैसला एकतरफा कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय ने मुजफ्फरनगर के ओम पाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
सहायक चकबंदी अधिकारी मुजफ्फरनगर ने 2012 में हुई चकबंदी के दौरान याची की गांव की सड़क किनारे स्थित भूमि को अपने नौ जनवरी 2016 के पुनरीक्षण आदेश के तहत याची के प्लाट को प्रतिवादी संख्या दो के खाते में आदेशित कर दिया। इससे याची सड़क किनारे स्थित भूमि से वंचित हो गया। याची ने सहायक चकबंदी अधिकारी के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।