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हाईकोर्ट : दहेज हत्या के अभियुक्त की उम्रकैद की सजा रद्द कर नौ साल कारावास की, रिहा करने का आदेश

Fri, 21 Jan 2022 08:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अभियुक्त ने दी गई सजा से अधिक 11 साल सात माह की कैद भुगत ली है। इसलिए उसे तत्काल रिहा किया जाए। कोर्ट ने इसके साथ पीड़िता की मां को दो लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज हत्या के आरोपित की उम्रकैद की सजा रद्द करते हुए उसे नौ साल के कारावास की सजा सुनाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि सत्र न्यायालय ने अचानक उत्तेजना में मारपीट से हुई मौत को हत्या न मानकर मानव वध करार देकर उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि, याची के खिलाफ हत्या करने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

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हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अभियुक्त ने दी गई सजा से अधिक 11 साल सात माह की कैद भुगत ली है। इसलिए उसे तत्काल रिहा किया जाए। कोर्ट ने इसके साथ पीड़िता की मां को दो लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति राजीव मिश्र की खंडपीठ ने दादरी के जानू उर्फ जान मोहम्मद की सजा के खिलाफ अपील स्वीकार करते हुए दिया है।


हाईकोर्ट ने आरोपित को निर्देश दिया है कि जिला जज गौतमबुद्धनगर के नाम दो लाख रुपये का डिमांड ड्राफ तीन माह में जमा करें, जिसे मृतका की मां को दिया जाए। यदि मां जीवित न हो तो मृतका के भाई-बहनों को पैसा दिया जाए। पैसा न जमा करने पर राजस्व वसूली प्रक्रिया अपनाई जाए।
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अपीलार्थी का तर्क था कि सात मार्च 2010 की शाम चार बजे वो काम से वापस घर लौटा। घर में देखा कि उसकी पत्नी की मौत हो चुकी थी। मायके वाले दूसरे दिन सुबह आए। जनाजा नमाज पढ़ने के बाद लाश दफना दी गई। इसके पहले मृतका के भाई यासिन ने दहेज हत्या के आरोप में दादरी थाना में एफआईआर दर्ज करा दी।


अपीलार्थी का कहना था कि उसका पांच साल का बेटा है। उसने हत्या नहीं की। पुलिस ने मामले में चार लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। सत्र न्यायालय ने अन्य आरोपित राजू, कल्लू व फेम को बरी कर दिया। अपीलार्थी को अीजीवन कारावास व 20 हजार रुपये जुमाने की सजा सुनाई। अपीलार्थी सत्र न्यायालय के फैसले के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी।

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