प्रदेश की अदालतों को जरूरी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के मुद्दे को लेकर कायम जनहित याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल, न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर, न्यायमूर्ति मनोज मिश्र, न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल, न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी, न्यायमूर्ति एमके गुप्ता, न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र की सात सदस्यीय वृहद पीठ कर रही है।
महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र ने भी अधिकारियों के रवैये पर कहा वह संतुष्ट नहीं हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ऐसी ब्यूरोक्रेसी पहले नहीं देखी। जो आदेश का पालन नहीं करती और स्पष्टीकरण भी नहीं देती। महाधिवक्ता ने कहा कि ऐसा ही उनका भी अनुभव है। वह हेल्पलेस हैं।
इस पर न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने कहा आप हेल्पलेस नहीं हैं। वृहद पीठ ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति हो रही है। क्या यह न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप नहीं है कि कोर्ट में जानकारी देने के लिए कोई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं है और सुनवाई टालनी पड़ रही है। अदालतों में मजिस्ट्रेटों के बैठने के लिए न्याय कक्ष व चेंबर नहीं हैं। इच्छानुसार काम नहीं कर पा रहे। महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र ने कोर्ट को अधिकतम सहयोग करने का आश्वासन दिया। सरकार अदालत का आदेश पालन करने के लिए बाध्य है।
कोर्ट ने अदालतों की मूलभूत सुविधाओं का डाटा बेस पेश करने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई 15 नवंबर को होगी।