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हाईकोर्ट : अफसरों को बचाने के लिए गंगा प्रदूषण मामले को एनजीटी में ले जाना चाहते हैं महाधिवक्ता

Mon, 01 May 2023 11:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में सोमवार को गंगा को प्रदूषण मुक्त कराने को लेकर दाखिल दर्जनों याचिकाओं की सुनवाई के दौरान याचियों ने कहा, उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं कराया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में सोमवार को गंगा को प्रदूषण मुक्त कराने को लेकर दाखिल दर्जनों याचिकाओं की सुनवाई के दौरान याचियों ने कहा, उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं कराया। महाधिवक्ता अपने अधिकारियों को बचाने के लिए मामले को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) स्थानांतरित करना चाहते हैं। फिलहाल कोर्ट ने मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। कोर्ट शीघ्र ही फैसला सुनाएगा कि गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने से जुड़े मुकदमों की सुनवाई हाईकोर्ट में होगी या राष्ट्रीय हरित अधिकरण में।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता अजय मिश्रा ने अर्जी देकर कोर्ट से कहा, गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने को लेकर सुनवाई का अधिकार राष्ट्रीय हरित अधिकरण को है। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए वह पूरी तरह से सक्षम है। उन्होंने अपनी दलील के समर्थन में हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट की ओर से पारित कई फैसलों का जिक्र किया। दूसरी ओर हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने सरकार की दलील का विरोध किया। कहा, इन याचिकाओं की सुनवाई हाईकोर्ट में ही होनी चाहिए। अगर हाईकोर्ट की ओर से मामले को सुनवाई के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण को भेजा जाता है तो ऐसी स्थिति में हाईकोर्ट की ओर से पारित अंतरिम आदेशों को समाप्त कर दिया जाए।

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याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता वीसी श्रीवास्तव, सुनीता श्रीवास्तव ने महाधिवक्ता की इस दलील का विरोध किया। कहा, यूपी सरकार ने गंगा प्रदूषण के मामले में हाईकोर्ट के पहले से पारित आदेशों का अनुपालन नहीं कराया। महाधिवक्ता अपने अधिकारियों को बचाने के लिए मामले को एनजीटी स्थानांतरित करना चाहते हैं। अधिवक्ता ने कहा,प्रयागराज में तमाम स्थानीय मुद्दे हैं जो इन याचिकाओं के जरिये उठाए जाते रहे हैं और उसका निदान भी हाईकोर्ट के आदेश से हुआ है। यदि हर प्रकार की याचिकाओं को यहां से गैर पोषणीय बताते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को भेज दिया जाएगा तो इससे आम जनमानस को नुकसान होगा। एनजीटी, एसटीपी वगैरह आदि का निरीक्षण नहीं कर सकती है।

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इसके अलावा यहां माघ मेला, महाकुंभ जैसे धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति ने भी इसी कोर्ट में लगातार मामले की सुनवाई की और कई आदेश पारित किए। एनजीटी का गठन 2010 में हुआ। नियम के मुताबिक मामले को स्थानांतरण का अधिकार याची को है। सरकार प्रतिवादी है, उसको केस स्थानांतरण करने का अधिकार नहीं है। महाधिवक्ता ने भोपाल गैस त्रासदी का हवाला दिया। लेकिन, याचियों की ओर से कहा गया कि गंगा प्रदूषण का मामला अलग है। उससे उसकी तुलना नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनकर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया।

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