रिपोर्टर को भी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब। पुलिस का कहना है कि स्टोरी गलत तथ्यों पर आधारित है, जिससे दो समुदायों के बीच घृणा फैलाने और लोक शांति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया है। सिद्धार्थ ने इस मामले को पहले सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीमकोर्ट ने मामले को हाईकोर्ट के समक्ष ले जाने का निर्देश दिया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वेब न्यूज पोर्टल द वॉयर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन और इसकी रिपोर्टर इशमत आरा को राहत देते हुए इनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है और मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। सिद्धार्थ और इशमत के खिलाफ दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान किसान नवनीत सिंह की मौत के मामले में वेब साइट पर प्रकाशित स्टोरी को लेकर मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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पुलिस का कहना है कि स्टोरी गलत तथ्यों पर आधारित है, जिससे दो समुदायों के बीच घृणा फैलाने और लोक शांति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया है। सिद्धार्थ ने इस मामले को पहले सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीमकोर्ट ने मामले को हाईकोर्ट के समक्ष ले जाने का निर्देश दिया था। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
याचिका पर न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने सुनवाई की। सिद्धार्थ व अन्य के खिलाफ रामपुर के संजू तुरिहा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि द वॉयर में प्रकाशित स्टोरी ने लोगों को किसान की मौत के मामले में भ्रमित किया, जिससे रामपुर के एक वर्ग के लोगों में भारी आक्रोश है और इससे दो समुदायों के बीच तनाव बढ़ा है। प्रकाशित स्टोरी में मृतक के बाबा के हवाले से कहा गया कि शव का पोस्टमार्टम करने वाले एक डॉक्टर ने बताया कि नवनीत की मौत गोली लगने से हुई है।
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बाद में रामपुर पुलिस ने इसका खंडन किया और कहा कि किसी भी डॉक्टर ने ऐसी कोई बात मीडिया या किसी व्यक्ति से नहीं कही है। मामले में सुप्रीमकोर्ट ने सितंबर 21 में आरोपियों को हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसके मद्देनजर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचीगण की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए प्रदेश सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।