इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाबा राघवदास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के डॉ कफील अहमद खान को चार साल से निलंबित रखने व विभागीय कार्यवाही पूरी नहीं करने पर राज्य सरकार से जानकारी तलब की है। डॉ. कफील ने अपना निलंबन समाप्त करने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की है। याचिका पर न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने सुनवाई की। याचिका की सुनवाई पांच अगस्त को होगी।
याची डा खान का कहना है कि उसे 22 अगस्त 17 को अस्पताल में आक्सीजन आपूर्ति मामले में निलंबित किया गया। जांच बैठाई गई। मगर जांच पूरी नहीं की गई तो उसने याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने तीन माह में जांच पूरी करने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश के बाद जांच अधिकारी ने 15 अप्रैल 19 को अपनी रिपोर्ट दे दी, जिसमें कफील को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया था।
सरकार ने इस रिपोर्ट पर 11 माह तक कुछ नहीं किया और इसके बाद दो बिंदुओं पर दुबारा जांच बैठा दी गई। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्यवाही में 11 माह का विलंब क्यों हुआ है। इसका जवाब नहीं दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार पिछले चार वर्षों से जारी निलंबन आदेश की जानकारी भी दे कि क्यों इतने लंबे से याची को निलंबित रखा गया है।
याची के अधिवक्ताओं की दलील थी कि सुप्रीमकोर्ट के पंजाब नेशनल बैंक बनाम कुंज बिहारी मिश्र केस में दिए गए निर्णय के अनुसार इतने लंबे समय तक याची को निलंबित नहीं रखा जा सकता है। जबकि डॉ. कफील के साथ निलंबित किए गए सात अन्य डाक्टर व मेडिकल स्टॉफ को बहाल कर दिया गया है। उधर, डाक्टर कफील खान ने अपने खिलाफ अलीगढ़ विश्वविद्यालय में दिए भाषण को लेकर दर्ज प्राथमिकी को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कफील पर आरोप है कि उन्होंने एनआरसी, सीएए को लेकर भड़काऊ भाषण दिए और साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की। इस याचिका पर मंगलवार तीन अगस्त को सुनवाई होनी है।