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शिक्षक को बड़ी राहत : अपराध की सजा पाने पर सरकारी सेवक को बर्खास्त नहीं किया जा सकता, हाईकोर्ट ने दिया आदेश

Wed, 13 Sep 2023 12:01 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के तमाम फैसलों के हवाले से कहा कि संविधान के अनुच्छेद 311(2) के तहत किसी सरकारी सेवक को बिना जांच कार्यवाही के बर्खास्त या सेवा से हटाया या रैंक घटाया नहीं जा सकता।
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court - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल अपराध की सजा के आधार पर किसी सरकारी सेवक को बर्खास्त नहीं किया जा सकता। ऐसा करने के लिए विभागीय जांच कार्यवाही किया जाना जरूरी है।

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कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के तमाम फैसलों के हवाले से कहा कि संविधान के अनुच्छेद 311(2) के तहत किसी सरकारी सेवक को बिना जांच कार्यवाही के बर्खास्त या सेवा से हटाया या रैंक घटाया नहीं जा सकता। इसी के साथ कानपुर देहात के उच्च प्राथमिक विद्यालय रसूलपुर के सहायक अध्यापक को दहेज हत्या में मिली उम्र कैद की सजा पर बीएसए द्वारा बर्खास्त करने के आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया और अनुच्छेद 311(2) के उपबंधों के अनुसार नए सिरे से दो माह में आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

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दहेज हत्या में सुनाई गई थी उम्रकैद की सजा

कोर्ट ने कहा कि याची की सेवा बहाली व सेवा परिलाभ नए आदेश पर निर्भर करेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल ने मनोज कुमार कटियार की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। मामले में याची की नियुक्ति 1999 में प्राइमरी स्कूल सराय में सहायक अध्यापक पद पर की गई। 2017 में पदोन्नति दी गई। 2009 में दहेज हत्या का केस दर्ज हुआ। सत्र अदालत ने याची को भी दोषी करार दिया और उम्र कैद की सजा सुनाई।

इसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कानपुर देहात ने याची को बर्खास्त कर दिया, जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी। याची का कहना था कि अनुच्छेद 311(2) के तहत बीएसए का बर्खास्तगी आदेश अवैध है। रद्द किया जाए। क्योंकि, बिना जांच व नैसर्गिक न्याय का पालन किए यह आदेश दिया गया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की नजीरें पेश कीं। इसमें साफ कहा है कि सरकारी सेवक को बिना विभागीय जांच कार्यवाही के बर्खास्त नहीं किया जा सकता। इस पर कोर्ट ने याची की बर्खास्तगी रद्द कर दी है।
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