चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
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इलाहाबाद। जवाहर बाग कांड की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश देते हुए हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले से निपटने में प्रदेश सरकार की हद दर्जे की नाकामी को वजह करार दिया है। कोर्ट ने प्रसिद्ध कहावत ‘रोम जलता रहा और नीरो बांसुरी बजाता रहा’ का हवाला देते हुए कहा कि कि प्रदेश सरकार नागरिकों की रक्षा करने और कानून का पालन कराने के अपने संवैधानिक दायित्व का पालन करने में नाकाम रही है।
पूरे घटनाक्रम का हवाला देते हुए पीठ का कहना था कि जिला प्रशासन के अधिकारी सरकार को लंबे समय से जवाहरबाग में चल रही गतिविधियों की जानकारी देते रहे मगर सरकार ने स्थानीय प्रशासन को असहाय स्थिति में छोड़ दिया था। बावजूद इसके कि जवाहर बाग कांड के मुख्य नेताओं की पहचान कर उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी मगर किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। खुफिया रिपोर्ट में ऐसे लोगों के नाम उजागर किए इसके बावजूद उनके नाम चार्जशीट में दर्ज नहीं किए गए। कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमणकारियों का जिला प्रशासन से खुला बचाव किया गया जबकि उन्होंने बाग के कर्मचारियों और अधिकारियों पर खुलेआम हमला किया। सरकारी भवनों पर जबरदस्ती कब्जा कर लिया, सरकारी दस्तावेजों को नष्ट किया। सैकड़ों पेड काट डाले, पार्क के अंदर खाने-पीने की चीजों की सप्लाई के लिए डिपो बना लिए गए।
इन सारी बातों की खुफिया रिपोर्ट और जिला प्रशासन द्वारा बार-बार भेजे गए पत्रों में जानकारी दी गई थी। मथुरा प्रशासन ने 11 जनवरी 2015 प्रमुख सचिव इंटेलिजेंस (गृह) को भेजी अपनी रिपोर्ट में सभी बातों का हवाला दिया है। मगर प्रशासन की इन सारी सूचनाओं पर सरकार कान बंद किए बैठी रही। यहां तक हाईकोर्ट द्वारा रिकार्ड मांगे जाने के बाद भी कोई रिकार्ड नहीं दिया गया। इससे याचिका में लगाए इस आरोप को बल मिलता है कि ऊपर बैठा व्यक्ति जिला प्रशासन को कार्रवाई करने से रोकता रहा। कोर्ट ने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए इस मामले की जांच किसी दूसरी एजेेंसी को सौंपना आवश्यक है।