लेकिन,ऐन वक्त पर सरकार की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता पीसी श्रीवास्तव और शासकीय अधिवक्ता आशुतोष कुमार ने अदालत को बताया कि सरकार की ओर जानकारी दी गई है कि अब इस मामले में महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र अभियोजन का पक्ष रखेंगे।
सरकार के इस कदम पर आजम खान के वकील इमरान उल्ला ने कड़ी आपत्ति जताई। कहा कि सरकार का यह आचरण मामले को जानबूझ कर टालने की कोशिश है। राजनीतिक विद्वेष के चलते आजम खान के परिजनों को सताया जा रहा है।
सरकार के इस कदम पर कोर्ट ने भी नाराजगी और हैरानी जताई। कोर्ट ने कहा कि बहस पूरी हो जाने के बाद इस तरह का वकील बदलना समझ से परे है। हालांकि, शासकीय अधिवक्ता आशुतोष कुमार सड की गुजारिश पर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 मई की तारीख नियत कर दी।
यह है पूरा मामला
विधानसभा चुनाव 2017 में अब्दुल्ला आजम स्वार से विधायक चुने गए थे। प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी नवाब काजिम अली खां उर्फ नावेद मियां व बाद में भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने फर्जी जन्म प्रमाणपत्र पर चुनाव लड़ने की शिकायत की थी। इस पर हाईकोर्ट ने अब्दुल्ला का चुनाव रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। अब्दुल्ला आजम के शैक्षिक प्रमाण पत्र में उनकी जन्मतिथि एक जनवरी 1993 दर्ज है और नगर निगम लखनऊ से जारी प्रमाणपत्र में 30 सितंबर 1990 दर्ज है। आजम खां सहित तीनों के खिलाफ फर्जी जन्म प्रमाणपत्र तैयार करने के आरोप में केस दर्ज किया गया था।