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गुंडा टैक्स : मौके पर पहुंचे अफसर आरोपों से घिरे चौकी इंचार्ज को हीरो बनाकर लौटे

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अवैध वसूली की जानकारी पर मौके पर पहुंची पुलिस।
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हफ्ते भर वसूली की अनदेखी करने वाले चौकी इंचार्ज ने ही लिखाई एफआईआर, आठ आरोपी गिरफ्तार
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एसपी देहात, सीओ और तहसीलदार ने सुबह ही मौके पर जाकर की जांच
एफआईआर में पुलिस का बैरियर लगाकर वसूली किए जाने का जिक्र नहीं
दुनका। बहगुल नदी के टूटे पुल पर पुलिस का बैरियर लगाकर राहगीरों से डंडे के जोर पर गुंडा टैक्स की वसूली कर रहे आठ आरोपियों को रविवार को रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया। यह सबकुछ सुबह ही एसपी देहात, सीओ और तहसीलदार के मौके पर पहुंचने के बाद हुआ। हफ्ते भर से कई शिकायतों के बावजूद वसूली की अनदेखी कर रहे चौकी इंचार्ज को इस कथित गुडवर्क का हीरो बना दिया गया। उन्हीं की तरफ से एफआईआर में उनकी तत्परता का गुणगान किया गया है।
दुनका-बिहारीपुर मार्ग पर बहगुल नदी के पुल का एक हिस्सा बाढ़ से 21 अक्तूबर को क्षतिग्रस्त होने से इस रास्ते पर आवागमन बंद हो गया था। बाढ़ का पानी कम होने के बाद दुनका के ही कुछ दबंग किस्म के लोगों ने टूटे पुल की मरम्मत कर वहां पुलिस का बैरियर लगा दिया और इधर से गुजरने वाले लोगों से 10 से 15 रुपये तक की वसूली शुरू कर दी। गुंडा टैक्स की वसूली का यह खेल सप्ताह भर से चल रहा था। कई शिकायतों के बावजूद चौकी की पुलिस मौके पर जांच करने तक नहीं पहुंची। शनिवार को भैया दूज पर वसूली की वजह से पुल के दोनों ओर लंबा जाम तक लग गया लेकिन फिर भी पुलिस अनजान बनी रही।
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रविवार को यह मामला मीडिया की सुर्खियां बना तो सुबह करीब दस बजे एसपी देहात राजकुमार अग्रवाल, सीओ मीरगंज एसके राय और तहसीलदार अरविंद कुमार जांच करने मौके पर पहुंचे। वसूली की पुष्टि के बाद मामले को रफादफा करने की तैयारी शुरू हुई। आरोपों से घिरे चौकी इंचार्ज सुनील त्रिपाठी की ओर से ही आननफानन आठ आरोपियों के खिलाफ थाना शाही में एफआईआर दर्ज कराई गई और उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया। इन लोगों पर रंगदारी वसूलने और राहगीरों को धमकाने के आरोप लगाए गए हैं।
ये हैं आठ आरोपी : राजकुमार गंगवार, विनोद कश्यप, छोटे लाल कश्यप, गोधन, पप्पू, सुनील, ढाकन और अरविंद कश्यप। सभी आरोपी दुनका के ही निवासी हैं।
अफसरों के हड़काने पर रात में ही पुल से हटाया वसूली का तामझाम
शनिवार रात मीडिया के जरिए यह मामला अफसरों तक पहुंचा तो उन्होंने रात में ही थाने के पुलिस कर्मियों को हड़काया। इसके बाद थाने के पुलिस वाले रात में ही मौके पर पहुंचे और वहां लोगों को रोककर वसूली करने के लिए लगाया गया पुलिस का बैरियर हटाने के साथ टूटे पुल पर लगाए गए रेत के बोरों और फंटियों को भी हटा दिया। सुबह एसपी देहात के साथ मीरगंज के सीओ और तहसीलदार पहुंचे तो मौके पर सारा तामझाम साफ था। अफसरों ने लोगों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि पुल पर कई दिनों से वसूली हो रही थी।
फिर भी एफआईआर में चौकी इंचार्ज की तत्परता का गुणगान
चौकी इंचार्ज सुनील त्रिपाठी की ओर से लिखाई गई एफआईआर में कहा गया है कि वे सात नवंबर को वांछितों की तलाश और शांति व्यवस्था के लिए गश्त पर थे, इसी दौरान एक मुखबिर ने उन्हें बहगुल के पुल पर राहगीरों से वसूली किए जाने की सूचना दी। उन्होंने मुखबिर को साथ लेकर फौरन पुल पर दबिश दी। उन्हें देखकर वसूली कर रहे आरोपी भाग निकले। मौके पर जनता के कई लोगों ने उन्हें पुल पर अवैध वसूली किए जाने की जानकारी दी। दिलचस्प यह भी है कि एफआईआर में पुलिस का बैरियर लगाकर वसूली करने का जिक्र नहीं है। चौकी इंचार्ज ने यह भी कहा है कि आरोपियों के नाम उन्हें मुखबिर ने बताए यानी अदालत में उनके बचाव का रास्ता पहले से साफ हो गया। इसके साथ यह भी उल्लेख करने से कन्नी काट गए हैं कि वे रविवार सुबह कितने समय गश्त पर थे। दरअसल यह एफआईआर तब लिखी गई जब अफसर मौके पर जांच करने पहुंचे। वसूली के लिए यहां किया गया सारा इंतजाम तब तक गायब हो चुका था।
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अब प्रधानों से रास्ता बनाने को कहा
एसपी देहात राजकुमार अग्रवाल ने बिहारीपुर और दुनका के प्रधानों को निर्देश दिया कि वे ईंट भट्ठों से रोड़ा मंगवाकर पुल पर इस लायक रास्ता बना दें ताकि पैदल राहगीर और दोपहिया वाहन निकल सकें।
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