छोटे बच्चों को यौन उत्पीड़न से बचाने की पहल करते हुए स्वास्थ्य विभाग की मानसिक स्वास्थ्य टीम ने बच्चों को गुड टच, बैड टच का अंतर खुद पहचानने के लिए जागरूक किया। नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. ईशान्या राज ने फोटो, कहानी, एक्शन के माध्यम से शरीर के संवेदनशील अंगों के स्पर्श, गुड टच-बैड टच, सेफ सर्कल की जानकारी दी।
प्राथमिक विद्यालय बैरहना में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि नोडल अधिकारी एनसीडी सेल डॉ. वीके मिश्रा ने किया। उन्होंने दिव्यांग बच्चों को सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श की जानकारी एवं बचाव की जानकारी दी। इस मौके पर कई बच्चों ने अपने साथ हुई घटनाओं को बेबाकी से बताईं और सुझाव लिए।
मनोचिकित्सक डॉ. राकेश ने संचालन करते हुए बचपन में होने वाले विभिन्न प्रकार के मानसिक परेशानियों और उपचार के बारे में बताया। डॉ. ईशान्या राज ने बताया कि सुरक्षित घेरे में अभिभावकों जैसे मम्मी-पापा, दादा-दादी और डॉक्टर हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि शरीर के निजी अंगों के छून से गुस्सा आए, घबराहट हो या अच्छा न लगे, किसी के जबरदस्ती पकड़ने, गोद में बैठना तथा होंठ, टांगों या हिप को बहाने से छूना बैड टच है। बच्चों को बताया गया कि कोई जान या अनजान व्यक्ति ऐसा करे तो तुरंत कम से कम मम्मी-पापा को जरूर बताएं। इस मौके पर श्रद्धा गोबराले, पूनम सिंह आदि मौजूद रहीं।