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छात्रों के समर्थन में बेमियादी धरने पर बैठीं छात्राएं

Mon, 01 May 2017 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हॉस्टलों को पूरी तरह से खाली कराए जाने (वॉश आउट) की प्रस्तावित कार्रवाई के विरोध में हुए बवाल के बाद नैनी जेल में बंद छात्रों का आमरण अनशन लगातार दूसरे दिन रविवार को भी जारी रहा। इस बीच छात्राएं भी छात्रों के समर्थन में आंदोलन में शामिल हो गईं और शाम को महिला हॉस्टल में बेमियादी धरना शुरू कर दिया। सोमवार को विश्वविद्यालय खुलने पर आंदोलन और तेज होने की उम्मीद है। छात्र-छात्राओं ने घोषणा की है कि कुलपति को हटाए जाने और विश्वविद्यालय में उनके कार्यकाल की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा।
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नैनी जेल में रविवार को छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र, उपाध्यक्ष अदील हमजा, एनएसर्यूआ के राष्ट्रीय सचिव विवेकानंद पाठक, छात्रनेता अखिलेश गुप्ता, दिनेश सिंह यादव, विकास तिवारी, देवमणि मिश्र, अजीत विधायक, शैलेंद्र मौर्य, सत्येंद्र यादव समेत सभी 22 छात्रा आमरण अनशन पर बैठे रहे। जेल में उनसे मिले गए समाजवादी छात्रसभा के उदय प्रकाश यादव से छात्रों ने कहा कि इविवि में भ्रष्टाचार और जिला प्रशासन की तानाशाही के खिलाफ उनका आंदोलन लोकतांत्रित ढंग से जारी रहेगा। छात्रों ने कहा कि जेल से छूटने के बाद मानवाधिकार आयोग के माध्यम से पुलिस से एक-एक लाठी का हिसाब लिया जाएगा और लाठीचार्ज के लिए दोषी पुलिस अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जाएगी।

उधर, रविवार शाम महिला हॉस्टल में सैकड़ों छात्राएं बेमियादी धरने पर बैठ गईं। छात्रों की मांग है कि गिरफ्तार किए गए छात्रों को तत्काल रिहा किया जाए और उनके खिलाफ दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं। छात्राओं ने कहा कि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो बेमियादी धरना आमरण अनशन में तब्दील कर दिया जाएगा। धरने पर बैठीं ऋचा सिंह, प्रियंका सिंह, सोनम सिंह, आशिया बानो, शालू यादव समेत तमाम छात्राओं ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन कुछ भी कर ले लेकिन आंदोलन कमजोर नहीं पड़ेगा।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हुए बवाल के छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध और जेल में बंद छात्रों के समर्थन में इविवि छात्रसंघ के कई  पूर्व अध्यक्षों ने भी मोर्चा खोल दिया है। रविवार को पूर्व अध्यक्षों की बैठक हुई, जिसमें विश्वविद्यालय एवं जिला प्रशासन से अपील की गई कि विश्वविद्यालय में पठन-पाठन के माहौल को सुचारू तरीके से चलाने के लिए त्रिपक्षीय वार्ता का आयोजन कर समस्याओं का समाधान करें।

पूर्व अध्यक्षों ने छात्रों से अपील की है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर अहिंसा के रास्ते पर चलकर और अराजकतत्वों से सावधान रहते हुए अपनी मांग के लिए संघर्ष  करें। पूर्व अध्यक्षों ने प्रशासन को भी आगाह किया है कि मुकदमों की एक पक्षीय कार्रवाई से आंदोलन और उग्र होगा और इससे समस्या का समाधान भी नहीं हो पाएगा। पूर्व अध्यक्ष समस्याओं के समाधान के लिए किसी भी तरह की पहल को तैयार हैं। बैठक में विनोद चंद्र दुबे, केके राय, कृष्ण मूर्ति सिंह यादपव, संजय तिवारी,  रिचा सिंह, हेमंत कुमार टुन्नू, अजीत यादव मौजूद रहे।

उधर, एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में कुलपति का पुतला फूंका और चेतावनी दी कि छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमे तत्काल वापस नहीं लिए गए तो सभी विद्यार्थी परीक्षा का बहिष्कार करेंगे। पुतला फूंकने वालों में मुकेश गौड़, रिंकू पयासी, जितेंद्र आदि शामिल रहे। वहीं, पूर्व सांसद धर्मराज पटेल ने छात्रों के आंदोलन और विश्वविद्यालय का माहौल बिगाड़ने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई की जांच कराए जाने और कुलपति एवं विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है। इसके अलावा छात्र स्वतंत्रता संघर्ष की ओर से भी बैठक कर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की निंदा की गई। बैठक में रवि कुमार, मोहम्मद जाबिर, रजा इलाहाबादी, मोहम्मद मोनिश, सौरभ पांडेय आदि मौजूद रहे। वहीं, एडीसी छात्रसंघ अध्यक्ष प्रफुल्ल देव शुक्ला ने इविवि के छात्र नेताओं से मुलाकात की और विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्रों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

दो दिनों की छुट्टी के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय सोमवार से खुल जाएगा। पहली मई को विश्वविद्यालय में कई परीक्षाएं होनी हैं और नियमित कक्षाओं का भी संचालन होना है। हालांकि छात्र-छात्राओं के इकट्ठा होने पर आंदोलन तेज हो सकता है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने स्तर से तैयारियां कर रखी हैं।
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