ज्यादातर पीड़िता छात्राएं
आने वाली शिकायतों में अधिकतर छात्राएं हैं। ये छात्राएं गोरखपुर, कानपुर, प्रतापगढ़, आजमगढ़, वाराणसी, लखनऊ, फतेहपुर, काैशाम्बी, अमेठी, सोनभद्र, रायबरेली समेत अन्य आसपास की जिलों से प्रयागराज आकर पढ़ाई कर रही हैं। इनका डाटा कहीं से लीक होने का शक है। पुलिस जालसाजों की पहचान करने में जुटी हुई है।
कान पकड़कर उठक-बैठक भी कराई
जालसाज अपने प्रोफाइल पिक्चर पर किसी पुलिसकर्मी को लगाए रहते हैं। यह देख छात्राएं डर जाती हैं। जिन छात्राओं ने इनको पैसा दिया है उसे यह लगातार ब्लैकमेल करते रहते हैं। वीडियो काॅलिंग पर कान पकड़कर उठक बैठक कराते हैं। साइबर सेल प्रभारी विनोद कुमार ने बताया कि जालसाजों का लिंक राजस्थान के मेवात से आया है।
डरने से और डराते हैं जालसाज : एक्सपर्ट
यूपी पुलिस के साइबर सलाहकार राहुल मिश्रा कहते हैं कि अगर किसी के पास ऐसी काॅल आती है तो वह डरे नहीं। इन बातों पर ध्यान दें...
1- जालसाज आपको ज्यादातर इंटरनेट पर ही काॅल करेंगे
2- नाॅर्मल काॅल पर अधिकतर कोड +92 +44 का होगा
3- खाता ऑनलाइन लिंक है तो आसानी से नाम जान लेंगे
4- अपनी निजी जानकारी सोशल मीडिया पर डालने से बचें
5- हेल्पलाइन नंबर 1930 और cybercime.gov.in सूचना दें
कर्नलगंज थाना क्षेत्र की रहने वाली एक छात्रा के पास फोन आया। काॅलर ने खुद को साइबर सेल अधिकारी बताते हुए कहा कि तुम्हारे मोबाइल से लगातार गंदा-गंदा वीडियो भेजा रहा है। तुम जेल जाओगी। तीन करोड़ रुपये तैयार रखो। शिकायत साइबर सेल काे दी गई।
इसी तरह फूलपुर की रहने वाली एक प्रतियोगी छात्रा ने साइबर पुलिस को बताया कि उसके पास एक काॅल आई। काॅलर ने पुलिस अधिकारी बताकर कहा कि वह अश्लील वीडियो देखती है। जांच करने पर उसका नाम सामने आया है। दस हजार रुपये भेज दो, मामला रफा-दफा हो जाएगा।
इसके बाद धूमनगंज थाना क्षेत्र निवासी एक छात्रा के पास व्हाट्सएप पर काॅल आई। काॅलर ने कहा कि वह अश्लील वीडियो देख रही है। उसके पास सारा डाटा आ गया है। अगर उसे बीस हजार रुपये नहीं दिए तो शिकायत उसके पापा से कर दी जाएगी।