इसी बीच ठग राजमन गाैड़ को इसकी जानकारी हुई। उसने राज्य मुक्त विद्यालय परिषद का सोसाइटी पंजीकरण करवाया। उसको पंजीकरण नंबर 12/2017-18 मिल गया। फिर उसने प्रयागराज और लखनऊ में इसका कार्यालय खोला। इसकी चार वेबसाइट बनवाई। कई जिलों इसकी शाखाएं खोलकर अंक पत्र बांटने का धंधा शुरू कर दिया। कई लोगों से उसने ठगी की। छह वर्ष पहले एक बार पकड़ा गया तो कुछ दिन ठगी बंद रही।
जेल से छूटा तो फिर से धंधा शुरू कर दिया। पत्राचार शिक्षा संस्थान के सहायक निदेशक रवींद्र नाथ ने बताया कि परिषद के गठन के संबंध में प्रयागराज के अधिवक्ता नितिन कुमार ने दो बार आरटीआई की थी। उनको जवाब भेजा गया कि गठन नहीं हुआ है। सत्यापन के लिए अंक पत्र कम ही आते थे। अब फिर से साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। फिलहाल उसकी फर्जी वेबसाइट चल रही है।
एनआईओएस तक पहुंच गया था ठग
परिषद के गठन के क्रम में एक वर्ष पहले संस्थान के कर्मचारी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) गए थे। वहां से भी मान्यता लेनी पड़ती है। जब कर्मचारी वहां गए तो उनसे कहा गया कि आप लोग पहले भी आ चुके हैं, क्या आपका काम नहीं हुआ। तब उनकी समझ में नहीं आया और अपनी फाइल देकर चले आए। अब समझ आया कि ठग वहां तक पहुंच गया था।