इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फेल को पास और पास को फेल का षडय़ंत्र करने के आरोपी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ की गिरफ्तारी पर रोक की मांग को लेकर दाखिल याचिका खारिज कर दी है। याचिका में निष्पक्ष पारदर्शी जांच कराने की भी मांग की गई थी।
यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी तथा न्यायमूर्ति आरके गौतम की खंडपीठ ने याचिका वापस करते हुए दिया है। याचिका पर घोटाले की जांच कर रही सीबीआई की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश ने प्रतिवाद किया। आयोग में अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती-2010 में घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने दिल्ली में चार अगस्त 2021 को आयोग के पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ के खिलाफ एफ आईआर दर्ज कराई थी।
प्रभुनाथ के साथ आयोग के अज्ञात कर्मचारी/अफसरों और बाहरी अज्ञात लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। सीबीआई ने आयोग से अभियोजन स्वीकृति मांगी है, ताकि एफआईआर में शामिल आयोग के अज्ञात कर्मचारियों/अफसरों को नामजद करते हुए कार्रवाई की जा सके।
उधर, प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ने हाईकोर्ट से पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ की याचिका खारिज होने के बाद आयोग के अध्यक्ष से मांग की है कि सीबीआई को तत्काल अभियोजन स्वीकृति प्रदान की जाए। समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय और मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि पूर्व परीक्षा प्रभुनाथ के साथ इस घोटाले में शामिल अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों, जिनके खिलाफ नामजद मुकदमा पंजीकृत करने के लिए सीबीआई ने आयोग को फाइल भेजी है, उस पर आयोग के अध्यक्ष को तत्काल निर्णय लेते हुए अनुमति दे देनी चाहिए ताकि भ्रष्टाचार में शामिल अन्य लोगों पर भी कानूनी कार्रवाई हो सके।