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High Court : प्रतिष्ठित कारोबारी पिता-पुत्र का विवाद सुलझाएंगे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, तीन माह का मिला समय

Sat, 06 Jul 2024 11:09 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर, डीएम और सीएमओ से तलब सीलबंद रिपोर्ट देखने और बुजुर्ग दंपती की सहमति के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने बुजुर्गों के प्रति मानवीय संवेदनाएं दिखाते हुए शुक्रवार को तीन बार सुनवाई की।
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अदालत (सांकेतिक)। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बेटे-बहू पर प्रताड़ना का आरोप लगा कर हाईकोर्ट पहुंचे जाने-माने कपड़ा कारोबारी पिता-पुत्र का विवाद सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश विनीत सरन सुलझाएंगे। उन्हें तीन महीने का समय दिया गया है। हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर, डीएम और सीएमओ से तलब सीलबंद रिपोर्ट देखने और बुजुर्ग दंपती की सहमति के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने बुजुर्गों के प्रति मानवीय संवेदनाएं दिखाते हुए शुक्रवार को तीन बार सुनवाई की।

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एसडी सिंह और न्यायमूर्ति डोनाडी रमेश की खंडपीठ ने जाने-माने कपड़ा कारोबारी दिनेश चंद्र रस्तोगी और उनकी पत्नी पुष्पा रस्तोगी की याचिका पर यह फैसला दिया। कोर्ट में तीन सदस्यीय कमेटी की सीलबंद रिपोर्ट देखी। कोर्ट ने अगले तीन महीने तक बुजुर्ग दंपती को दी गई स्वतंत्रता, चिकित्सा और सुरक्षा बरकरार रखने के निर्देश दिए।

बुजुर्ग के बेटे-बहू की ओर से पेश अधिवक्ता राहुल अग्रवाल ने कोर्ट में कहा कि माता-पिता की ओर से लगाए गए प्रताड़ना के आरोप बेबुनियाद हैं। वह उनके जन्मदाता हैं। अगर उनके किसी बर्ताव से उन्हें कोई तकलीफ है तो समस्या का हल पारिवारिक बातचीत से निपटाया जा सकता है।

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याची दंपती के अधिवक्ता आयुष मिश्रा ने कहा कि बेटे का यह नर्म बर्ताव अदालत के कड़े रुख की वजह से है। हालांकि, उन्होंने बातचीत से सहमति जताई। इस पर कोर्ट ने मामले को हाईकोर्ट मध्यस्थता केंद्र संदर्भित करने पर विचार शुरू किया तो पक्षकारों ने मंथन के लिए थोड़ा वक्त मांगा। इस पर सुनवाई लंच तक स्थगित कर दी गई।

लंच के बाद ढाई बजे फिर शुरू हुई सुनवाई में पक्षकारों ने कहा कि मध्यस्थता केंद्र में यह पारिवारिक विवाद न निपट सकेगा। लिहाजा, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश विनीत सरन को मध्यस्थ नियुक्त कर दिया जाए। कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश से सहमति लेकर साढ़े तीन बजे तक बताने को कहा। सहमति मिल जाने पर कोर्ट ने उन्हें मध्यस्थ नियुक्त कर दिया। मध्यस्थता की रिपोर्ट तीन महीने में देनी होगी।

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क्या है पूरा मामला

बेटे-बहू पर प्रताड़ता का आरोप लगाते हुए बुजुर्ग दंपती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सुरक्षा की गुहार लगाई थी। बुजुर्ग दंपती का आरोप है कि उन्हें एक कमरे में लंबे समय से बंद रखा गया है। खाना, पानी और शौचालय तक की सुविधा भी नहीं दी जा रही है। इस पर कोर्ट ने जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर और सीएमओ से संयुक्त कमेटी बनाकर जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जमा करने का निर्देश दिया था।

हर घर में ऐसी कहानी मिलेगी

बुजुर्ग कारोबारी दिनेश कुमार रस्तोगी ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि उनके साथ ऐसा होगा। जरा सी भनक होती ताे आज ये दिन न देखना पड़ता। आगे यह भी जोड़ा कि इस तरह के घरेलू विवाद हर घर की कहानी हो गए हैं। यह आम बात हो गई है। जिस घर के दरवाजे की कुंडी बजाएंगे तो कुछ इसी तरह का मिलता-जुलता केस मिलेगा। हाईकोर्ट के संज्ञान में पूरा मामला है। और कुछ नहीं कह सकता हूं।

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