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Digital Areest : पूर्व सीएमओ से ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर 1.26 करोड़ की ठगी, डिजिटल अरेस्ट कर की वारदात

Sat, 11 May 2024 01:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

पूर्व सीएमओ प्रयागराज में रह चुके हैं और वर्तमान में अयोध्या में तैनात हैं। धूमनगंज के कालिंदीपुरम में उनका निजी आवास भी है। उन्होंने पुलिस को बताया कि जनवरी में उन्हें अनुराग ठाकुर नाम के व्यक्ति ने उन्हें सी4 केकेआरसीए व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ दिया।
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Cyber - फोटो : Freepik
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विस्तार
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डिजिटल अरेस्ट कर 1.48 करोड़ की ठगी के बाद जनपद में साइबर ठगी की एक और बड़ी वारदात सामने आई है। साइबर अपराधियों ने पूर्व सीएमओ डाॅ. आलोक वर्मा से ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर 1.26 करोड़ रुपये ठग लिए। अलग-अलग खातों में रकम जमा करा ली और फिर लोन दिखाकर उन पर ही रुपये देने का दबाव बनाने लगे। साइबर थाना पुलिस एफआईआर दर्ज कर जांच में जुट गई है।

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पूर्व सीएमओ प्रयागराज में रह चुके हैं और वर्तमान में अयोध्या में तैनात हैं। धूमनगंज के कालिंदीपुरम में उनका निजी आवास भी है। उन्होंने पुलिस को बताया कि जनवरी में उन्हें अनुराग ठाकुर नाम के व्यक्ति ने उन्हें सी4 केकेआरसीए व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ दिया। इसके बाद विश्वास में लेकर उन्हें ऑनलाइन ट्रेडिंग के लिए प्रेरित किया गया। फिर अलग-अलग ग्रुप में जोड़ते हुए विभिन्न खातों से कुल 1.26 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।

यही नहीं एक ट्रेडिंग पेज बनाकर निवेश की गई रकम की मार्केट वैल्यू 3.11 करोड़ रुपये दर्शाई गई। फिर बताया कि उनकी निवेश राशि पर लॉटरी से उनके नाम कैपिटल एसएफबी का आईपीओ आवंटित हुआ है। हालांकि जब उन्होंने निवेश की गई रकम वापस चाही तो कैपिटल एसएफबी के आवंटित शेयर लेने के लिए कुल 3.17 करोड़ का लोन दिखाकर उनका शेयर ट्रेडिंग पेज लॉक दिखा दिया। यही नहीं चैट कर मकान आदि बेचकर लोन की रकम चुकाने की धमकी दी। साथ ही निवेश की गई रकम को लौटाने से इंकार कर दिया। भुक्तभोगी अफसर मामले की शिकायत लेकर पहुंचे तो पुलिसकर्मी भी स्तब्ध रह गए। फिलहाल साइबर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात में केस दर्ज कर लिया है।

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ऐसे करें बचाव

साइबर एक्सपर्ट मो. हसन जैदी ने बताया कि ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर ठगी के मामलों में साइबर अपराधी एक फर्जी वर्चुअल ट्रेडिंग पेज बनाते हैं। यह उसी व्यक्ति के नाम पर होता है। इसमें रकम बढ़ती हुई दिखाई जाती है ताकि व्यक्ति झांसे में आकर निवेश करता जाए। जैसे ही वह व्यक्ति रकम वापसी की बात करता है तो उसे बताया जाता है कि ट्रेडिंग अकाउंट लॉक हो गया है और इसे अनलॉक करने के लिए और धनराशि मांगी जाती है। ऐसे में ऑनलाइन ट्रेडिंग करते वक्त सबसे पहले संबंधित स्टॉक ब्रोकर की प्रमाणिकता की जांच खुद से कर लें। व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप के जरिए जानकारी में आए किसी स्टॉक ब्रोकर के झांसे में कतई न आएं।
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