यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने यादव सिंह की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। मामले में 13 जनवरी 2012 को गौतमबुद्धनगर में धोखाधड़ी, गबन, भ्रष्टाचार के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी।
नोएडा के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिल पाई है। सीबीआई की गाजियाबाद की विशेष अदालत ने धारा 88 के तहत पूरक चार्जशीट में जमानत बांड स्वीकार करने से इन्कार कर दिया था। अब हाईकोर्ट ने भी हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यादव सिंह सीआरपीसी की धारा 88 का लाभ पाने के हकदार नहीं हैं। वे नियमित जमानत अर्जी दाखिल कर सकते हैं।
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यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने यादव सिंह की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। मामले में 13 जनवरी 2012 को गौतमबुद्धनगर में धोखाधड़ी, गबन, भ्रष्टाचार के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने याची के खिलाफ विभिन्न मामलों में तीन चार्जशीट दाखिल की। जिसमें आय से अधिक संपत्ति का भी केस बना। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई।
इसके बाद सीबीआई ने अलग बांड पर पूरक चार्जशीट दाखिल की। इसपर याची ने धारा 88 के तहत जमानत बांड स्वीकार करने की अर्जी दी। विशेष अदालत ने खारिज कर दी। इसके बाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने कहा गैर जमानती अपराध में समन जारी किया गया और आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी गई हो तो वह धारा 88 का लाभ नहीं ले सकेगा। विशेष अदालत का आदेश सही है। वह नियमित जमानत अर्जी दाखिल कर सकता है।