सार
न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की कोर्ट ने कानपुर के सौरभ सुचारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला कमांडेंट होमगार्ड, कानपुर नगर के आदेश को रद्द करते हुए नए सिरे से याची के दावे पर विचार करने का निर्देश दिया है। साथ ही तीन महीने की अवधि में निर्णय देने का निर्देश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कर्मचारी के निधन की तारीख पर लागू नियम के अनुसार ही अनुकंपा नियुक्ति के दावे का निर्धारण किया जाना चाहिए। कर्मचारी की मृत्यु के बाद पारित आदेश को लागू नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की कोर्ट ने कानपुर के सौरभ सुचारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला कमांडेंट होमगार्ड, कानपुर नगर के आदेश को रद्द करते हुए नए सिरे से याची के दावे पर विचार करने का निर्देश दिया है। साथ ही तीन महीने की अवधि में निर्णय देने का निर्देश दिया है।
मामले में कानपुर निवासी याची के पिता की होमगार्ड विभाग में मानद कंपनी कमांडर के पद पर रहते हुए 18 अक्तूबर 20 को मृत्यु हो गई थी। याची की मां ने याचिकाकर्ता बेटे को मानद कंपनी कमांडर के पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने के लिए आवेदन किया।
जिला कमांडेंट होमगार्ड, कानपुर नगर की ओर से पारित आदेश से याची को होमगार्ड (स्वयंसेवक) के पद नियुक्ति दी गई। इसके विरोध में उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर होमगार्ड विभाग में मानद कंपनी कमांडर के पद पर अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए प्रार्थना की। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए तीन माह में याची के दावे पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया।