इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेजों में पीएचडी इंक्रीमेंट के लिए एक बार फिर रार शुरू हो गई है। अध्यापक छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप पीएचडी इंक्रीमेंट की मांग कर रहे हैं। इससे कॉलेजों के करीब 200 शिक्षक प्रभावित हैं। अध्यापकाें के व्हाट्सअप ग्रुप पर भी इसे लेकर बहस शुरू हो गई है।
प्रमोशन और परास्नातक कोर्स के लिए अनुमति मिलने के बाद कॉलेजों में अध्यापकों का बड़ा वर्ग कुलपति के पक्ष में खड़ा हो गया है। इससे ईतर एक धड़ा पीएचडी इंक्रीमेंट को लेकर आंदोलन की तैयारी में है। केंद्रीय दर्जा मिलने के कुछ समय बाद ही विश्वविद्यालय के अध्यापकों को दो पीएचडी इंक्रीमेंट का लाभ मिलने लगा लेकिन कॉलेज के शिक्षकों को नौ फरवरी 2009 से यह लाभ दिया गया। शुरू में अध्यापकों को छठवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार वेतन का तीन प्रतिशत इंक्रीमेंट दिया गया लेकिन कुछ ही महीने बाद इसकी समीक्षा की गई। इसके बाद पांचवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार स्लैब में इंक्रीमेंट दिया जाने लगा। इसके अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर को 275 रुपये प्रति वर्ष के अनुसार 550, असिस्टेंट प्रोफेसर ग्रेड-2 को कुल 650 तथा एसोसिएट प्रोफेसर को कुल 840 रुपये मिलते हैं। यह राशि पूर्व की तुलना में काफी कम है। ऐसे में अध्यापक छठवें वेतन आयोग के अनुसार पीएचडी इंक्रीमेंट की मांग को लेकर आंदोलन की तैयारी में हैं। जल्द ही उनका प्रतिनिधिमंडल विश्वविद्यालय के अफसरों से मिलेगा।