Prayagraj News : प्रयागराज में तेजी से बढ़ रहा है गंगा-यमुना का जलस्तर।
- फोटो : अमर उजाला।
बाढ़ की विभीषिका को इससे ही समझा जा सकता है कि शनिवार शाम तक 17 राहत शिविरों में 1100 परिवारों के 5100 से अधिक लोग पहुंच गए थे। इसके अलावा पलायन एवं शिविरों में बाढ़ प्रभावितों के पहुंचने का क्रम लगातार जारी रहा। इसके अलावा शहर और ग्रामीण इलाकों में पीड़ितों को निकालने व राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 128 नावों को लगाया गया है।
Prayagraj News : प्रयागराज में तेजी से बढ़ रहा है गंगा-यमुना का जलस्तर।
- फोटो : अमर उजाला।
हजारों लोग बाढ़ से चौतरफा घिरे घरों में भी फंसे हैं। चोरी का डर तथा अन्य वजहों की वजह से लोग अपना घर नहीं छोड़ना चाहते। तीन-चार दिनों से इस तरह से फंसे लोगों के सामने खाना-पानी, दवा, आवागमन समेत अनेक समस्याएं खड़ी हो गई हैं। यहां तक कि मोबाइल स्विच ऑफ होने की वजह से अपनों संपर्क भी टूट गया है। प्रशासन की ओर से राहत पैकेट जाने तथा अन्य सुविधाएं दिए जाने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन नाकाफी साबित हो रहे हैं। ऐसे में बढ़ते जलस्तर से उनकी चिंता और बढ़ गई है।
गंगा-यमुना का गुस्सा थमने की ओर
गंगा-यमुना का गुस्सा थमने लगा है। शनिवार की देर शाम गंगा-यमुना दोनों की रफ्तार धीमी पड़ने लगी। उधर, यमुना की सहायक नदियों केन, बेतवा और चंबल का भी उफान नरम पड़ने लगा है। ऊपर से फिर जल दबाव नहीं बढ़ा तो कछारी इलाकों में बाढ़ का संकट आगे बढ़ने से रूक सकता है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष की ओर से शनिवार की रात 10 बजे जारी बुलेटिन के मुताबिक गंगा दो सेंमी प्रति घंटा और यमुना तीन सेमी. प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रही हैं। चंबल में पानी लगातार घट रहा है। केन, बेतवा में भी उफान कम हो गया है। रात 10 बजे तक नैनी में यमुना का जलस्तर 85.54 मीटर रिकार्ड किया गया। इसी तरह गंगा के जलस्तर में भी लगातार तेजी से वृद्धि हो रही है। यहां गंगा का जलस्तर इस अवधि तक 85.55 मीटर रिकार्ड किया गया।
गंगा -यमुना के रौद्र रूप के साथ ही श्मशान घाटों के अलावा कई शहरी इलाकों में पानी भरता जा रहा है। दारागंज श्मशान घाट डूबने के बाद अब बांध के ऊपरी हिस्से में शवों का अंतिम संस्कार कराया जा रहा है। उधर, बाढ़ खंड के अभियंताओं ने 24 घंटे तक इसी तरह गंगा-यमुना के जलस्तर में वृद्धि होने का दावा किया है। गंगा में इस दिन भी बैराजों से पानी छोड़ा गया। हरिद्वार से 42,956 क्यूसेक, नरोरा से 37,441 क्यूसेक और कानपुर बैराज से 1,27,539 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।