मानसून की बारिश से बढ़े मच्छर डेंगू, मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियों का कारण बन रही है। अगस्त के 20 दिनों में अब तक डेंगू के दस मरीज चिह्निंत हो चुके हैं। इनमें दो का निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है। वहीं सरकारी अस्पतालों में डेंगू मरीजों की भरमार है। मेडिकल कॉलेज लैब में जांच न कराने की वजह से स्वास्थ्य विभाग डेंगू संक्रमितों की पुष्टि नहीं कर रहा है।
कोरोना काल के दौरान डेंगू समेत अन्य बीमारियों के आंकड़े बेहद कम सामने आ रहे हैं। वर्ष 2019 के मुकाबले वर्ष 2020 में यानी पिछले साल डेंगू के चिह्नित मरीज 57 रहे। इस बार जुलाई में एक तथा अगस्त में डेंगू के चिह्नित मरीजों की संख्या दस पहुंच गई है।
सरकारी अस्पतालों के डेंगू वार्ड खाली हैं। वहीं निजी अस्पतालों में भर्ती बुखार के मरीजों में डेंगू संक्रमण का खौफ है। चिकित्सकों के मुताबिक बुखार के तीस फीसदी मरीजों में डेंगू के लक्षण मिल रहे हैं। रक्त जांच की रिपोर्ट में प्लेटलेट्स की कमी से संक्रमण पुष्ट किया जा रहा है। एक लाख से चालीस हजार तक प्लेटलेट्स काउंट को सामान्य तथा इससे नीचे प्लेटलेट्स काउंट आने पर मेडिकल कॉलेज की पैथालॉजी में डेंगू की जांच कराई जाती है।
मच्छरों पर नहीं काबू, राहत कार्य बेअसर
इस वर्ष चिह्नित डेंगू के मरीज शहरी क्षेत्रों के रहने वाले हैं। इनमें पांच उन बाढ़ प्रभावित इलाकों के हैं, जहां जलजमाव की समस्या बनी है। नगर निगम, जिला मलेरिया विभाग का दावा है कि बाढ़ पभावित ही नहीं सभी वार्डों में शेड्यूल बनाकर एंटी लार्वा छिड़काव और फॉगिंग का कार्य कराया जा रहा है। दावों के विपरीत जलभराव प्रभावित इलाकों में रहने वालों का कहना है कि मच्छरों से बचाव के लिए किए जा रहे उपाय नाकाफी हैं। इस लापरवाही से ही डेंगू, मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियां पांव पसार रही हैं।
पिछले तीन वर्ष में डेंगू मरीजों का विवरण
वर्ष 2019- 1121 मरीज
वर्ष 2020- 57 मरीज
वर्ष 2021- दस मरीज( 21 अगस्त तक)