सिविल लाइंस स्थित रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ (आरआरसी) कार्यालय में फर्जी आईएएस बनकर आरआरसी चेयरमैन पर धौंस जमाने की कोशिश कर रहे व्यक्ति के खिलाफ सिविल लाइंस पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी सिर्फ रौब गांठने की खातिर ही चेयरमैन से मिलने पहुंचा था।
आरआरसी कार्यालय में रेलवे ग्रुप डी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन कार्य चल रहा है। शुक्रवार को जौनपुर निवासी प्रदीप कुमार सिंह 55 वहां पहुंचा और खुद को 1991 बैच का आईएएस अधिकारी बताते हुए चेयरमैन विवेक प्रकाश से मिलाने की बात कही। चेयरमैन से उसने खुद का डीआरएम से लेकर कई बड़े राजनीतिक लोगों से अपने करीबी संबंध बताए। चेयरमैन के आईकार्ड मांगने पर उसकी पोल खुल गई।
उसे सिविल लाइंस पुलिस के हवाले कर दिया गया। थाने लाकर पुलिस ने उससे काफी देर तक पूछताछ की। शुरूआत में उसने पुलिस को भी झांसा देने की खूब कोशिश की। पहले वह खुद को वाराणसी निवासी पीके सिंह बताता रहा। उसने बताया कि वाराणसी में उसका एक स्कूल चलता है जिसका वह प्रबंधक है। फिर उसने खुद को सॉफ्टवेयर इंजीनियर बताना शुरू किया। पुलिस भी आरोपी के बार-बार बयान बदलने से परेशान हो गई। कड़ाई से पूछताछ के बाद उसने सच उगला। इंस्पेक्टर राकेश चौरसिया के मुताबिक खुद को बड़ा दिखाने के लिए वह ऐसी हरकतें करता है। अभ्यथियों से पैसा लेने वाली कोई बात फिलहाल सामने नहीं आई। रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से आई तहरीर के आधार पर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।