इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में शिक्षक भर्ती के लिए अलग-अलग विषयों के एक्सपर्ट पैनल को मंजूरी दे दी गई है। शनिवार को विधि विभाग के सभागार में आयोजित विश्वविद्यालय कार्य परिषद की शिक्षक भर्ती के लिए आए आवेदनों की स्क्रीनिंग का क्राइटेरिया भी स्वीकृत कर दिया गया। साथ ही वित्त अधिकारी (एफओ) एवं परीक्षा नियंत्रक के रिक्त पदों पर नियुक्ति का निर्णय लिया गया और दीक्षांत समारोह को फिर से शुरू किए जाने पर सहमति बनी।
कार्य परिषद की बैठक से एक दिन पहले ही राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की ओर से विश्वविद्यालय को पत्र जारी कर शिक्षक भर्ती रोकने और इसके लिए यूजीसी की संस्तुति लिए जाने का निर्देश दिया है, लेकिन कार्य परिषद की बैठक में एक्सपर्ट पैनल मंजूर होने के बाद साफ हो गया है कि इविवि प्रशासन भर्ती रोकने को किसी भी सूरत में तैयार नहीं है। अलग-अलग फैकेल्टियों की ओर से भेजे गए एक्सपर्ट पैनल को सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया। वहीं, आवेदनों की स्क्रीनिंग का क्राइटेरिया भी यूजीसी ने संशोधित किया है। संशोधित क्राइटेरिया को भी बैठक में स्वीकृत कर दिया गया। शिक्षक भर्ती के लिए एक्सपर्ट पैनल को मंजूरी मिलने के बाद इविवि प्रशासन अब जल्द ही इंटरव्यू की तिथि घोषित करेगा।
विश्वविद्यालय में कई वर्षों से दीक्षित समारोह नहीं हुआ है। पिछले दिनों हुई एकेडमिक कौंसिल की बैठक में इसके आयोजन को मंजूरी दी गई थी। कार्य परिषद ने इस पर भी अपनी अंतिम मुहर लगा दी। वहीं, विश्वविद्यालय में वित्त अधिकारी (एफओ) और परीक्षा नियंत्रक के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए फिर से विज्ञापन जारी किए जाने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के पूरा छात्र ईश्वर टोपे की ओर से विश्वविद्यालय को दान में दिए गए तकरीबन 10 करोड़ रुपये की संपत्ति के मूल्य के बराबर की रकम विश्वविद्यालय को दिलवाने, हॉस्टल आवंटन में सुधार के लिए नियमों में संशोधन, ऑडिटोरियम आदि के सुधार के लिए कुलपति की ओर से किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए कार्य परिषद के सदस्यों ने बैठक की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू का अभिनंदन किया।
इविवि कार्यपरिषद की बैठक में सीएमपी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आनंद श्रीवास्तव का कार्यकाल पांच साल के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया गया। सीएमपी के प्राचार्य का रिटायरमेंट आठ नवंबर को है। हाल ही में यूजीसी ने नया नियम लागू किया है कि कुलपतियों की भांति कॉलेज के प्राचार्य भी 70 वर्ष की आयु तक पद पर रह सतके हैं, लेकिन इस नियम को विश्वविद्यालय ने अभी अपनाया नहीं है। वहीं, यह प्रावधान भी है कि कुलपति चाहें तो प्राचार्य का पांच साल के लिए अलग से पुनर्नियुक्त कर सतके हैं। बैठक में यही चर्चा हुई कि प्राचार्य का कार्यकाल बढ़ाया जाए या पुनर्नियुक्त किया जाए। उनका कार्यकाल बढ़ाए जाने पर सहमति बनी। डॉ. आनंद श्रीवास्तव जनवरी 2015 में सीएमपी के कार्यवाहक प्रचार नियुक्ति हुए थे जबकि नवंबर 2016 में सेलेक्शन कमेटी के बाद उन्हें स्थायी प्राचार्य बना दिया गया। सूत्रों का कहना है कि उनका कार्यकाल स्थायी नियुक्ति के दिन से बढ़ाया गया है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के चांसलर गोवर्धन मेहता का कार्यकाल 12 जून 2017 को समाप्त हो चुका है। विश्वविद्यालय में नए चांसलर की नियुक्ति होनी है। इसके लिए कार्य परिषद के सदस्यों ने बंद लिफाफे में चांसलर के लिए अलग-अलग नाम प्रस्तावित किए। थे। चांसलर के लिए देश के नामी वैज्ञानिकों या अन्य प्रबुद्ध व्यक्तियों में से किसी का चयन किया जाना है। कुलपति सदस्यों की ओर से दिए गए नामों में तीन नाम चांसलर के लिए चुनेंगे और इसके बाद प्रस्तावित नाम केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजे जाएंगे।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने हाल ही नियम लागू किया है कि प्रोफेसर 62 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद रिसर्च नहीं करा सकेंगे। शनिवार को विश्वविद्यालय की कार्य परिषद में इसे भी मंजूरी दे दी गई। अब विश्वविद्यालय में भी प्रोफेसर 62 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद रिसर्च नहीं करा सकेंगे।
इविवि में वरिष्टता के आधार पर शिक्षक अधिकतम दो वर्ष के लिए विभागाध्यक्ष के पद पर रहे सकते हैं, लेकिन विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेजों में इस बाबत कोई नियम नहीं है। कॉलेज में नियम बनाने के लिए कार्य परिषद की बैठक के दौरान डीन कॉलेज डेवलमेंट कौंसिल की अध्यक्षता में एक कमेटी के गठन का निर्णय लिया गया।
कार्य परिषद की बैठक की शुरुआत ही हंगामेदार रही। सूत्रों के मुताबिक बैठक शुरू होते ही एक वरिष्ठ सदस्य ने आपत्ति जताई कि विश्वविद्यालय के नए रजिस्ट्रार हितेश लव दो हफ्ते पहले इलाहाबाद आ चुके हैं तो उन्हें अब तक ज्वाइन क्यों नहीं कराया गया। यह आपत्ति भी जताई कि बैठक में उनकी उपेक्षा क्यों की जा रही है। इस पर वीसी ने कहा कि नए रजिस्ट्रार इससे पहले किसी शिक्षण संस्थान से नहीं जुड़े थे, सो उन्हें विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली समझने में थोड़ा वक्त लगेगा। इसी वजह से रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी अब तक प्रो. एनके शुक्ला संभाल रहे हैं। वीसी ने कहा कि नए रजिस्ट्रार की ज्वाइनिंग को मंजूरी दे दी गई है। जल्द ही उन्हें कार्यभार सौंप दिया जाए। वह इविवि की कार्यप्रणाली को समझ सकें, इसी वजह से उन्हें बैठक में बतौर विशेष सदस्य आमंत्रित किया गया है।
कार्य परिषद की बैठक में इविवि में अकादमी पुनर्गठन के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगी। इससे पहले 22 सितंबर को एकेडेमिक कौंसिल की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके तहत विश्वविद्यालय में संकायों की संख्या चार से बढ़ाए 13 की जानी है। इनमें पुराने और नए दोनों तरह के विभाग शामिल किए जाएंगे। नए विभागों में रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को ही तरजीह दी जाएगी। इस पर भी अंतिम मुहर लगी कि विश्वविद्यालय पश्चिम बंगाल के गवर्नर को एलएलबी की मानद उपाधि देगा। हालांकि एकेडेमिक कौंसिल की बैठक में 22 सितंबर को यह प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है।