संगमनगरी की सियासी धरती से राजनीतिक स्वीकार्यता पूरे देश के लिए मिसाल बन चुकी है। 1962 के लोकसभा चुनाव में जहां जवाहर लाल नेहरू ने अपने प्रतिद्वंद्वी राम मनोहर लोहिया को चुनाव लड़ने के लिए कार और 25 हजार रुपये दिए थे, वहीं 1977 के लोकसभा चुनाव में फूलपुर से जनेश्वर मिश्र के हाथों हारने वाले वीपी सिंह उन्हें अपनी सरकार में मंत्री बनाकर स्वच्छ राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का संदेश दे चुके हैं।
यह राजनीतिक घटना 1977 के लोकसभा चुनाव की है। तब इंदिरा गांधी ने फूलपुर से कांग्रेस की ओर से जगपत दुबे का भी नाम प्रस्तावित किया था। लेकिन, हेमवती नंदन बहुगुणा इसके पक्ष में नहीं थे। वह चाहते थे कि फूलपुर से वीपी ही चुनाव लड़ें। तब राजनीतिक गलियारों में चाणक्य कहे जाने वाले बहुगुणा के इस सियासी तीर पर कई विश्लेषण भी आए थे। उन दिनों कहा जा रहा था कि इस बिसात से एक तो जगपत दुबे किनारे लग जाएंगे और दूसरे इलाहाबाद सीट पर चुनाव लड़ रहे बहुगुणा को विश्वनाथ प्रताप की मदद मिल जाएगी और वह जीत जाएंगे। लेकिन, फूलपुर से चुनाव लड़ने के लिए वीपी सिंह तैयार नहीं हो रहे थे।