उधर प्रशासन की ओर से बीपीसीएल में ऑक्सीजन उत्पादन तथा सिलिंडर बनाए जाने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। वहां से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। इसके अलावा प्रभा इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन ने ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए सरस्वती हाईटेक सिटी में चार हजार वर्ग मीटर जमीन के लिए आवेदन किया है।
कंस्ट्रक्शन संस्था के प्रबंधन की प्लांट लगाने वाली इकाइयों से भी वार्ता चल रही है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। शंभूनाथ ग्रुप की ओर से भी ऑक्सीजन प्लांट लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्लांट संस्थान के अस्पताल में ही लगाने की योजना है। इनके अलावा एक अन्य संस्थान ने ऑक्सीजन प्लांट के लिए उद्योग विभाग के अफसरों से संपर्क किया है। उसके पास खुद की जमीन भी है। उपायुक्त उद्योग अजय चौरसिया का कहना है कि कई अन्य उद्यमियों से भी ऑक्सीजन प्लांट लगाने की बात चल रही है। ऐसे में ये प्रयास सफल हुए तो नए प्लांट लगने और उत्पादन शुरू होने के बाद प्रयागराज जिले में तो ऑक्सीजन की मांग पूरी होगी ही, यहां से अन्य जनपदों को भी आपूर्ति की बात कही जा रही है।
ऑक्सीजन प्लांट के अन्य विकल्पों पर हो रहा विचार
जिले में आक्सीजन उत्पादन की संभावना तलाशे जाने के बीच कई अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। सरस्वती हाईटेक सिटी में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए उद्यमियों से संपर्क किया जा रहा है। इसके अलावा नैनी इंडस्ट्रियल एरिया में कई लोगों ने भूखंड एलाट कराए हैं, लेकिन उन पर अभी कारखाने नहीं लगे हैं। इन भूखंडों को ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए दूसरे उद्यमियों को किराए पर दिए जाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
...लेकिन नए प्लांट लगाने में लग सकता है एक से डेढ़ महीना
ऑक्सीजन प्लांट लगाने की कई उद्यमियों ने इच्छा जाहिर की है लेकिन उनके सामने मशीन एवं उपकरणों की उपलब्धता की चुनौती है। ऑक्सीजन प्लांट तैयार करने वाली गिनती की इकाइयां हैं। कोरोना संक्रमण के बीच देश भर में नए ऑक्सीजन प्लांट लगाने की कवायद शुरू की गई है। इसलिए प्लांट लगाने वाली इकाइयों के पास अधिक डिमांड है। ऐसे में नए ऑक्सीजन प्लांट लगाने में कम से कम एक से डेढ़ महीने का समय लगने की बात कही जा रही है। इसके बाद उत्पादन शुरू होने में डेढ़ से दो महीने लग जाएंगे। यही वजह है कि यहां संस्थाओं तथा उद्यमियों ने ऑक्सीजन प्लांट लगाने की प्रक्रिया तो शुरू कर दी है लेकिन उनकी पूरी कवायद प्लांट उत्पादन इकाइयों के जवाब पर निर्भर है।